ले चलो मुझे उस दुनिया में, जहां…
रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविता ‘जहां निर्भय चित्त हो’ से प्रेरित
Read MoreJunputh
रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविता ‘जहां निर्भय चित्त हो’ से प्रेरित
Read More
भाजपा को अपने इस अभियान को सफल करना है तो गांधी परिवार को राजनैतिक रास्ते से हटाना होगा क्योंकि गांधी परिवार ने दंडवत होने से या रास्ता छोड़ देने से इनकार कर दिया है। सत्ता के चारों हथियार साम, दाम, दंड, भेद गांधियों को झुकाने में नाकाम रहे हैं।
Read More
सूरिनाम, गयाना, मोरिशस और अपने अंडमान-निकोबार में मैंने ऐसे कई परिवार देखे हैं, जिनमें पति तो पूजा करता है और उसकी पत्नी नमाज़ पढ़ती है या ‘प्रेयर’ करती है। ये लोग सच्चे आस्तिक हैं लेकिन जो भेदभाव करते हैं, वे जितने आस्तिक हैं, उससे ज्यादा राजनीतिक हैं। वे दूसरों के तो क्या, अपने ही मजहब में अपना संप्रदाय अलग खड़ा कर लेते हैं और उसके जरिये अंधभक्तों को अपने जाल में फंसाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।
Read More
पिछले तीन साल के दौरान देश में घटनाक्रम इतनी तेज़ी से बदला है कि न तो मीडिया ने संघ के शिकारपुर आर्मी स्कूल की कोई सुध ली और न ही अखिलेश ने ही बाद में कुछ भी कहना उचित समझा। अब ‘अग्निपथ’ के अंतर्गत साढ़े सत्रह से इक्कीस (बढ़ाकर तेईस) साल के बीच की उम्र के बेरोज़गार युवाओं को ‘अग्निवीरों’ के रूप में सशस्त्र सेनाओं के द्वारा प्रशिक्षित करने की योजना ने संघ के आर्मी स्कूल प्रारम्भ किए जाने के विचार को बहस के लिए पुनर्जीवित कर दिया है।
Read More
जिस स्वरूप के राष्ट्र-निर्माण की पीड़ा या प्रक्रिया से हम गुज़र रहे हैं उसमें तानाशाही सर्वहारा की नहीं बल्कि धर्म की स्थापित होने वाली है। इस्लामी राष्ट्रों में उपस्थित एक धर्म विशेष के साम्राज्य या धार्मिक तानाशाही के समानांतर बहुसंख्यकों द्वारा पालन किए जाने वाले धर्म की तानाशाही।
Read More
डॉक्टर साहब सोचते- मेरी जानकारी में मेरे खानदान ने पैसे के अतिरिक्त कुछ कमाया नहीं। फिर लड़की इज्जत लेकर कैसे चली गई? मेरे खानदान वालों ने इज्जत का खजाना कहाँ छुपा रखा है?
Read More
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के बांगरमऊ, उन्नाव से प्रत्याशी अनिल कुमार मिश्र के मुताबिक हफीजाबाद में 22 फरवरी 2022 को चुनाव से पहले वाली शाम भाजपा के लोगों द्वारा पैसे बांटे गए। अनिल कुमार मिश्र ने उन्नाव जिले के चुनाव अधिकारी को रात सवा नौ बजे लिखित शिकायत भेजी।
Read More
‘विश्व गुरु’ बनने जा रहे भारत देश के प्रधानमंत्री को अगर अपना बहुमूल्य तीन घंटे का समय सिर्फ़ एक निरीह विपक्षी दल के इतिहास की काल-गणना के लिए समर्पित करना पड़े तो मान लिया जाना चाहिए कि समस्या कुछ ज़्यादा ही बड़ी है।
Read More
इन सम्मानों का लालच इतना बढ़ गया है कि पद्मश्री जैसा सम्मान पाने के लिए लोग लाखों रु. देने को तैयार रहते हैं। समाज के प्रतिष्ठित और कुछ तपस्वी लोग ऐसे नेताओं के आगे नाक रगड़ते रहते हैं, जो उनकी तुलना में पासंग भर भी नहीं होते।
Read More
सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी और मामले में पूर्व में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए जज ने अपने ऑर्डर में कहा कि जब सच को झूठ से अलग करना सम्भव न हो, जब अनाज और भूसा पूरी तरह आपस में मिल गए हों; विकल्प यही बचता है कि सभी साक्ष्यों को ख़ारिज कर दिया जाए।
Read More