बात बोलेगी: सुबह से शाम, ‘सुरों के नेता’ का हर एक काम देश के नाम…

कलाएं रचते भगवान आज तक अबूझ बने हुए हैं, तो उन जैसे तैंतीस कोटि भगवानों के नेता की लीला भला कौन जाने? फिर भी यह लिखने की ज़रूरत क्यों आन पड़ी?

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देशान्‍तर: फ़िलिपींस में बढ़ता राष्ट्रवाद और बाहुबली राष्ट्रपति दुएर्ते की अजब दास्ताँ

इस कॉलम के माध्यम से भारत के बाहर चल रहे संघर्षों, मुद्दों, वहां की राजनैतिक परिस्थिति और दुनिया भर में बढ़ रही उदारवादी और दक्षिणपंथी ताक़तों को भारतीय मानस में …

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