बात बोलेगी: ‘लव जिहाद’ के सरपट घोड़े, दौड़े.. दौड़े… दौड़े…..

‘लव’ जैसा चिर-नवीन शब्द और अहसास इसलिए ‘जिहाद’ बना दिया जा रहा है ताकि इस अहसास के पनपने से पहले इसमें युद्धपोतों की गर्जनाएं और उनसे उत्पन्न रक्तरंजित दृश्य नज़रों के सामने शाया हो जाएं।

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