राज्य, सरकार, कानून और समाज की जटिल गुत्थी: अनिल चौधरी का एक व्याख्यान

यह जो समय था अंदर से चीजों को बदलने का वो पूरा हो चुका है। वो दिन लद चुके हैं जब इस इमारत को ठोक पीटकर रिपेयर किया जा सकता था, ठीक किया जा सकता था। हमारे बाप दादाओं की पीढ़ी ने कोशिश करके देख लिया। हम भी लास्ट स्टेज में पहुंच चुके हैं।

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तिर्यक आसन: परिवार और सामुदायिकता में लगा परजीवी स्टेट का कीड़ा

अपने प्रतिनिधियों की सरकार और अपने आविष्कारों पर जनता की निर्भरता देख स्टेट चिंतामुक्त हो गया है। हमारी चेतना पर वो तमाम पट्टियाँ बाँध चुका है। एक पट्टी खुलती है, तब तक राजनीति और धर्म के प्रतिनिधियों के सहयोग से नई पट्टी बाँध देता है।

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राग दरबारीः पंत से लेकर अंत तक राजसत्ता की मज़हबी जंग के सात दशक

पॉल ब्रास के अनुसार, पंडित पंत की नीति का ही यह परिणाम था कि आने वाली आधी शताब्दी तक मुसलमानों की भागीदारी उत्तर प्रदेश की सरकारी सेवाओं और पुलिस में लगातार कम होती चली गयी.

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