पंचतत्व: मिथिला में अब कहां मीन और कहां मखान!

असल में पिछले डेढ़ दशक से मिथिला के शहरी इलाकों में जल संकट गहराने लगा है. उसके पहले ऐसा होना अभूतपूर्व ही थी. मिथिला के पोखरे भूमिगत जल स्तर को रिचार्ज करते रहते थे और सदियों से यह कुदरती तौर पर वॉटर हार्वेस्टिंग का तरीका था.

Read More

पंचतत्व: चुगलों के चंगुल में फंसी प्रकृति के साथ सहजीवन का प्रतीक सामा चकेबा

लोक आस्था का पर्व छठ हो या फिर सामा चकेबा, दोनों ही पर्यावरण के पर्व हैं. भाई-बहन के रिश्ते को भैया दूज और राखी से परे ले जाकर सामा-चकेबा का पर्व अद्भुत आयाम देता है. इस आयाम में, प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को बेहद मासूम अभिव्यक्ति दी जाती है.

Read More