पुलिस और नागरिक : सत्ता बनाम स्वतंत्रता का द्वंद्व
जब पुलिस नागरिक को नियंत्रित करने को अपना प्राथमिक दायित्व समझती है और नागरिक पुलिस को अपने अधिकारों के लिए बाधा मानने लगता है, तब दोनों के बीच कानून का संबंध कमजोर होकर शक्ति का संबंध बन जाता है। पुलिस कहती है – हमारे पास शक्ति है। नागरिक कहता है- मेरे पास अधिकार है। लोकतंत्र का प्रश्न है- अंततः किसकी चलेगी? इसका उत्तर बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए-कानून की।
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