दक्षिणावर्त: अदृश्य भय वाला सेकुलरिज्म बनाम फ़र्ज़ी डराने वाला इस्लामोफोबिया

मुद्दा क्या होना चाहिए था और क्या है? मुद्दा था कि इस्लाम के नाम पर फ्रांस में एक और हत्या हुई। यह तमाम हत्याओं की फेहरिस्‍त में एक और हत्या मात्र है और कम से कम अब इस्लाम के ऊपर बात होनी चाहिए। यह लेकिन मुद्दा नहीं बना। मसला इस बात को बनाया गया कि मैक्रां ने इस्लाम के ऊपर टिप्पणी की है और वह एक हत्यारे के बहाने ‘इस्लामोफोबिया’ को बढ़ावा दे रहे हैं।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और मुस्लिम समुदाय

मुसलमानों के प्रति केंद्र में सत्तारूढ़ दल का नजरिया पहले की सरकारों से अलग है. इसलिए 2014 के बाद से एक प्रकार से अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर मुसलामानों को सुनियोजित तरीके से बहिष्कृत करने के प्रयासों से जूझना पड़ रहा है.

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आंखी दास ने कंपनी में मांगी माफी, ट्विटर खाता किया बंद, IOC US ने कहा इस्‍तीफ़ा दो!

बज़फीड की ख़बर के मुताबिक आंखी दास ने एक पोस्‍ट शेयर की थी जिसमें मुस्लिमों को ‘’डिजनरेट’’ यानी पतित कहा गया था। इस पोस्‍ट पर उन्‍होंने कंपनी के मुस्लिम कर्मचारियों से लिखित माफी मांगते हुए कहा है कि ‘’मेरी फेसबुक पोस्‍ट की मंशा इस्‍लाम को अपमानित करने की नहीं थी।‘’

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दक्षिणावर्त: आज़ादी के 73 वर्ष, कुछ मील के पत्थर और…

इस्लाम को भारतीयता के अनुकूल न ढालकर फिलहाल हमारे समय की दो बड़ी विचारधाराएं एक ही गलती कर रही हैं। यह गलती भारत को भारी पड़ने वाली है।

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मुस्लिम छात्रों से अमानवीय व्यवहार के सम्बन्ध में प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों की विज्ञप्ति

भोपाल: समाचारों से पता चला है कि इंदौर शहर में कक्षा 12 की परीक्षा के दौरान एक स्कूल के मुस्लिम छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण बर्ताव किया गया। वहां का बंगाली स्कूल इस्लामिया …

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भारत में मुस्लिम साम्प्रदायिकता की जड़ें औपनिवेशिक काल के अभिजन मुसलमानों तक जाती हैं

जिस तरह से हिन्दू साम्प्रदायिकता का अपना अलग आधार है उसी तरह से मुस्लिम साम्प्रदायिकता का। दोनों एक दूसरे के सहारे पली पुसी हैं यह इस समस्या एक पहलू भर …

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राज्य के बरअक्स मुसलमानों का टूट चुका आत्मविश्वास किसकी देन है?

सवाल है कि आख़िर राज्य के हर संसाधन में नागरिक होने के कारण अपनी हिस्सेदारी के एहसास में कमी मुसलमानों में किन वजहों से आयी है? इसके लिए कौन राजनीतिक शक्तियाँ ज़िम्मेदार हैं?

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राग दरबारीः पंत से लेकर अंत तक राजसत्ता की मज़हबी जंग के सात दशक

पॉल ब्रास के अनुसार, पंडित पंत की नीति का ही यह परिणाम था कि आने वाली आधी शताब्दी तक मुसलमानों की भागीदारी उत्तर प्रदेश की सरकारी सेवाओं और पुलिस में लगातार कम होती चली गयी.

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करोड़ों प्रवासी भारतीयों की रोज़ी-रोटी को खतरे में डाल रही है घरेलू साम्प्रदायिकता

भारत का कितना आर्थिक और राजनीतिक नुकसान होगा यह तो अभी विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता मगर देश की बदनामी हो रही है, जिसके लिए सिर्फ वे लोग ज़िम्मेदार हैं जिनको लगता है कि मुसलमान को नीचा दिखा कर उनका स्थान ऊंचा हो जाएगा.

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