‘साइना’ और ‘जामुन’: पुरुष वर्चस्व को चुनौती देती आज़ाद स्त्रियों की कहानियां

आज लड़कियां विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़कर अपने देश का नाम रोशन कर रही हैं और अपने माता-पिता से भी उनके संबंध काफी मधुर हैं, जिससे उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि लड़कों की चाह रखना परिवार की आवश्यकता नहीं है बल्कि हमारे समाज के दकियानूसी विचारों का परिणाम हैl

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अफगानी महिलाओं के लिए क्या गुलामी का नया अध्याय साबित होगी अमेरिकी सेना की वापसी?

करीमी और अन्य युवा महिलाएं जो पार्लर में काम कर रही हैं, उन्होंने कभी तालिबान के शासन का अनुभव नहीं किया, लेकिन वे सभी यह चिंता करती हैं कि अगर तालिबान सत्ता हासिल कर लेता है, तो उनके सपने खत्म हो जाएंगे।

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साज़‍िशोंं के पहरे… पहरों की साज़‍िश…

वो दिन दूर नहीं अब जब दूसरे धर्मों में शादी करने वाली हिन्दू लड़कियों को सुधार-गृह भी भेजा जाएगा, उनकी धार्मिक शुद्धि भी की जाएगी और ज़रूरी लगा तो शारीरिक और मानसिक यातना भी दी जाएगी. ऐसी शादियों से हुए बच्चों के साथ ये हिन्दुत्ववादी क्या करेंगे, इसका तो अगर सोचने बैठेंगे तो ही रूह कांप जाएगी.

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दुनिया में धार्मिक कट्टरपंथी सरकारों का उदय औरतों को प्रजनन न्याय से दूर कर रहा है!

मानवीय आपदा में भी अनुकूल क़ानूनी वातावरण का होना सेवा प्रदाताओं द्वारा व्यापक गर्भपात देखभाल प्रदान कराने के लिए ज़रूरी है। ऐसे समय में महिलाओं और लड़कियों के लिए असुरक्षित गर्भपात का ख़तरा बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु दर बढ़ती है।

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COVID-19 के दौरान महिला-हिंसा की समानांतर महामारी पर APCRSHR-10 में चर्चा

हाल ही में संपन्न हुए एपीसीआरएसएचआर10 (10वीं एशिया पैसिफिक कांफ्रेंस ऑन रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ एंड राइट्स) के दूसरे वर्चुअल सत्र में महिला-अधिकार पर काम करने वाली अनेक महिलाओं ने एशिया पैसिफिक में कोविड-काल के पश्चात जनमानस के अधिकारों और विकल्पों को गतिशीलता प्रदान करने के विषय पर चर्चा करते हुए एशिया पैसिफिक में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनके अधिकारों के संबंध में केवल खानापूर्ति की गई है.

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