गाहे-बगाहे: या इलाही ये मुहल्ला क्या है!

उत्तर भारत का यह खास धार्मिक परिदृश्य है और हजारों की संख्या में ऐसे ही मंदिरों से ऐसे ही भजन प्रतिदिन छह-आठ घंटे बजाये जाते हैं। जबरन। और कोई भी ऐतराज करे तो दंगा करने के लिए तैयार बैठे धर्मप्राण।

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पोर्टलैन्ड के आंदोलन से क्या “दलित लाइव्स मैटर” के लिए हम कुछ रोशनी ले सकते हैं?

ऑक्युपाइ की तरह पोर्टलैन्ड का यह विरोध भी दैहिक है, भौतिक है- अप्रत्यक्ष या परोक्ष (वर्चुअल) नहीं। भारत में भी जातिवाद, पूँजीवाद जैसी विकृतियों के खिलाफ जो भी अभिव्यक्ति होनी है वह प्रत्यक्ष और वास्तविक रूप से ज़ाहिर करनी होगी।

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जाति का उन्मूलन: कल, आज और कल

आनंद तेलतुम्बड़े हमारे समय के सबसे महत्‍वपूर्ण चिंतकों में एक हैं। पिछले दिनों उनके कहे-लिखे पर काफी विवाद खड़ा किया गया है। प्रस्‍तुत लेख उन्‍होंने ”समयांतर” के लिए लिखा था …

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