बिल गेट्स की भविष्यवाणी के आईने में समझिए बजट 2021-22 में दर्ज “स्वास्थ्य संकट”!

बजट 2021-22 की अच्छी बातों में विश्व स्वास्थ्य संगठन का क्षेत्रीय रिसर्च सेन्टर खोलने के अलावा चार वायरोलॉजी प्रयोगशालाओं की स्थापना का लक्ष्य है। सरकार ने कहा है कि शुद्ध हवा के लिए विभिन्न योजनाओं पर 22 सौ करोड़ तथा स्वास्थ्य योजनाओं पर 64 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की है कि कई स्तर पर हेल्थ केयर इंस्टिट्यूट की स्थापना की जाएगी। अलग से ‘‘मिशन पोषण 2.0’’ शुरू किया जाएगा।

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तन मन जन: नीति आयोग का ‘विज़न 2035’ और जनस्वास्थ्य निगरानी के व्यापक मायने

भारत में जन स्वास्थ्य की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर आम लोगों को लग सकता है कि सरकार की यह पहल ‘‘स्वागतयोग्य’’ है लेकिन इसका निहित उद्देश्य और उसके पीछे का सच जानना भी जरूरी है।

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तन मन जन: स्वास्थ्य मौलिक अधिकार है, सरकार को बार-बार यह याद क्यों दिलाना पड़ता है?

सर्वोच्च न्यायालय ने कोरोना काल में इलाज के नाम पर लूट और मौत बांटते निजी अस्पतालों की मनमानी तथा राज्य सरकारों की लापरवाही आदि के मद्देनजर फिर से अनुच्छेद 21 का हवाला देकर स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार और सरकारों की यह संवैधानिक जिम्मेवारी है।

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तन मन जन: ‘स्वास्थ्य की गारंटी नहीं तो वोट नहीं’- एक आंदोलन ऐसा भी चले!

भारत में जन स्वास्थ्य राजनीति का मुख्य एजेण्डा क्यों नहीं बन पाया? यह सवाल भी उतना ही पुराना है जितना कि देश में लोकतंत्र। आजादी के बाद से ही यदि पड़ताल करें तो लोगों के स्वास्थ्य और शिक्षा की मांग तो जबरदस्त रही लेकिन राजनीति ने लगभग हर बार इस मांग को खारिज किया। अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ तथा कई गैर सरकारी संगठनों ने अपने तरीके से जन स्वास्थ्य का सवाल उठाया, सरकारों ने महज नारों को स्वास्थ्य का माध्यम माना और संकल्प, दावे, घोषणाएं होती रहीं लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और है।

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तन मन जन: महामारी से भी बड़ी बीमारी है लॉकडाउन से उपजी गरीबी

कोरोनाकाल में सामूहिक तौर पर भारत के आम लोगों की स्थिति इसी मरणासन्न मरीज की तरह हो गई है जिसे अपनी जिन्दगी भी बचानी है। सवाल अस्तित्व का है। संकट विकट है।

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तन मन जन: सबसे खौफ़नाक दौर में पहुंच चुका है मलेरिया पैदा करने वाला परजीवी

इस लेख में मैं हजारों साल पुरानी महामारी मलेरिया की चर्चा करूंगा। 50,000 साल पुरानी यह महामारी अब अपने खौफनाक दौर में है!

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क्यूबा ने कोरोना पर कैसे पायी विजय? क्यूबा के राजदूत के साथ एक संवाद

8 अगस्त, 2020 को अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन (एप्सो), जोशी-अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज़ (जे.ए.आई.एस.एस) तथा इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेव्लपमेंट (आई.डी.पी.डी) द्वारा आयोजित वेबिनार में अपने वक्तव्य की शुरुआत भारत में क्यूबा के राजदूत ऑस्कर मार्टिनेज़ ने की

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तन मन जन: हमारे शरीर की प्राइवेसी को सरेआम बेचने के प्रोजेक्‍ट का ऐलान हो चुका है!

आपकी बीमारी की प्रोफाइल, क्लिनिकल जांच रिपोर्ट, इलाज का विवरण आदि। अब तक आपके स्वास्थ्य और क्लिीनिकल जांच का विवरण डाक्टर की अनुशंसा पर आपके पास हार्ड कॉपी के रूप में होता था। अब यह डिजिटल डेटा के रूप में आपके डिजिटल हेल्थ ब्लूप्रिंट में दर्ज होगा।

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तन मन जन: जब स्वास्थ्य व्यवस्था ही बीमार है तो कैसे हो इलाज?

जब देश की जनता प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर ताली और थाली बजा रही थी तभी कोरोना वायरस देश में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था। उनके अगले राष्ट्रीय प्रसारण …

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समय की आवश्यकता है कि सभी निजी स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीयकरण हो!

वर्ष 2019-20 में भारत में रूपये 1765 प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर औसतन खर्च किया जा रहा था, यानि मात्र रूपये 3.50 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन का खर्च। उन्होंने कहा कि सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य खर्चों में कटौती करने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को नीतिगत बढ़ावा दिया। देश के कुछ राज्य तो सिर्फ निजी स्वास्थ्य सेवाओं के हवाले कर दिए गए हैं जिसके चलते सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं खुले बाजार की व्यवस्था में लूट का माध्यम बन गई हैं।

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