यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है… अश्रु स्वेद रक्त से, लथपथ लथपथ…

क्या हमें भी उन टीवी चैनलों सा संवेदनहीन हो जाना चाहिए जो जलती चिताओं के दृश्य दिखाते-दिखाते अचानक रोमांच से चीख उठते हैं- ‘’प्रधानमंत्री की चुनावी सभा शुरू हो चुकी है, आइए सीधे बंगाल चलते हैं।‘’

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तन मन जन: कोरोना की दूसरी लहर का कहर और आगे का रास्ता

यदि वैक्सीन लगाने की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो 70 फीसद आबादी को वैक्सीन लगाने में दो साल से भी ज्यादा का वक्त लग सकता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में अब तक लगभग 30 करोड़ लोग कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अभी 100 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित नहीं हुए हैं और उन्हें बचाना सबसे बड़ी चुनौती है।

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बिल गेट्स की भविष्यवाणी के आईने में समझिए बजट 2021-22 में दर्ज “स्वास्थ्य संकट”!

बजट 2021-22 की अच्छी बातों में विश्व स्वास्थ्य संगठन का क्षेत्रीय रिसर्च सेन्टर खोलने के अलावा चार वायरोलॉजी प्रयोगशालाओं की स्थापना का लक्ष्य है। सरकार ने कहा है कि शुद्ध हवा के लिए विभिन्न योजनाओं पर 22 सौ करोड़ तथा स्वास्थ्य योजनाओं पर 64 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की है कि कई स्तर पर हेल्थ केयर इंस्टिट्यूट की स्थापना की जाएगी। अलग से ‘‘मिशन पोषण 2.0’’ शुरू किया जाएगा।

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तन मन जन: कोरोना के बाद अब उसकी वैक्सीन का डर!

कोरोना वायरस संक्रमण के वैश्विक प्रचार और दहशत के बाद अब जो चर्चा सरेआम है वह है इसके वैक्सीन से उपजी दहशत की। वैक्सीन की वैधता, गुणवत्ता तथा भविष्य में इसके दुष्‍परिणाम पर छिटपुट बहस के अलावा लगभग हर ओर चुप्पी है। सरकारें भी स्पष्ट नहीं हैं कि वैक्सीन सरकार लाएगी या बाजार। कीमत और उपलब्धता भी स्पष्ट नहीं है।

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