ज़िंदाँनों में सब बराबर हैं: जेल में फादर स्‍टेन स्‍वामी की लिखी एक कविता

फादर स्टेन की मूल कविता ‘प्रिज़न लाइफ- अ ग्रेट लेवलर’ का हिन्दी अनुवाद राजेंदर सिंह नेगी ने किया है और यहाँ उनके फ़ेसबुक से साभार प्रकाशित है

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सज़ा तो मिलेगी आतताइयों को यदि चला यह चक्र युगों तक…!

शैलेन्द्र चौहान की पांच कविताएं ईहा सारंगी के तारों से झरताकरुण रसहल्का हल्का प्रकाशकानों में घुलने लगते मृदु और दुःखभरे गीतशीर्षहीन स्त्रीसारंगी तू सुनमद्धम सी धुन अनवरत तलाश एक चेहरे …

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महाभारत महामारी-कालीन: एक कविता

नेत्रहीन नहीं धृतराष्ट्रहैं वे दृष्टिहीन एक विकराल युद्ध केबन गए तमाशबीन भरी सभा में हुईएक अस्मिता वस्त्रहीन महामात्य रहे अचलभावशून्य मर्म-विहीन युद्ध छिड़ा सर्वत्रप्रचंड संगीन अनगिनत लाशों सेरणभूमि रंगीन लाखों …

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स्मृतिशेष: एक नागरिक-कवि का जाना केवल कविता का नुकसान नहीं होता

वह पहला मौका था जब लालबाज़ार में मैंने उस शख्‍स को साक्षात् देखा: एक ऐसा धोती कुर्ताधारी, जिसके भीतर करुणा और दृढ़-निश्‍चय बराबर मात्रा में थे, जो उसे आपत्ति में खड़ा होने को अन्तः प्रेरित करते थे।

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बढ़ा है लूट का कारोबार, ऐ ज़ुल्म! आ मुझे मार : दुनु रॉय की एक कविता

ऐ ज़ुल्म मुझे मार, कई-कई बार गैस से बहा आंसू ज़ारो कतार, लहू से रंग दे अपनी तलवार चीर दे योनी फोड़ ये कपार ऐ ज़ुल्म आ मुझे मार कर …

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इतनी हवा बनाने के बाद भी वे डरे रहते थे कि किसी दिन उलटी हवा न चल पड़े…

राजेन्द्र राजन जनसत्ता दैनिक से अब अवकाश प्राप्त हैं. किशन पटनायक की समाजवादी धारासे आते हैं और बनारस की पैदाइश हैं. भागमभाग और काटमकाट वाली इस दुनिया में राजेन्द्र राजन का व्यक्तित्व और कविता दोनों ही कबीराना ठहराव और दृष्टि के साथ चुपचाप उपस्थित होते हैं और जो कहना है, कह जाते हैं.

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