“इन 18 महीनों में हमने वो भी खो दिया जो हमारा था”: कश्मीर में विकास के दावों का ज़मीनी सच

जिन समुदायों के साथ यह बातचीत हुई, वे पुराने निज़ाम को फिर से याद करने लगे हैं जबकि कश्मीर के स्थापित परिवारों और खानदानों को लेकर उनके मन में कोई सहानुभूति नहीं है बल्कि वे तो यह मानते हैं कि ‘उनके साथ ठीक ही हुआ’।

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बात बोलेगी: कश्मीर में बैठ के कश्मीर को समझने का अहसास-ए-गुनाह

आखिर को दिल्ली- जिसे देश की राजनैतिक राजधानी का दर्जा प्राप्त है और जिसके वैभव में कश्मीर से कम सभ्यताओं और शासकों के आवागमन का इतिहास दर्ज है- भी ठीक उसी गति को प्राप्त हुई है जिस गति को कश्मीर? क्या वाकई कोई नागरिक प्रतिरोध दिल्‍ली में देखा गया? याद नहीं पड़ता।

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कश्मीर में तीन पत्रकारों के खिलाफ शुरू हुई जांच पर CPJ का बयान

30 जनवरी को पुलिस ने दि कश्‍मीरवाला के रिपोर्टर यशराज शर्मा, दि कश्‍मीरियत के रिपोर्टर जुनैद और इन दोनों वेबसाइटों के संपादक फ़हद शाह व काज़ी शिबली के खिलाफ जांच शुरू की। आरोप है कि इन्‍होंने लोगों को अपनी खबरों से भड़काने का काम किया था।

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‘आज नहीं तो कल, लोग फट पड़ेंगे’: दो फर्जी मुठभेड़ों और हत्याओं के बाद कश्मीर

घाटी में अविश्वास का माहौल तो पहले से ही था। फर्जी मुठभेड़ की इन दो घटनाओं ने पुलिस और आम जनता के बीच के विश्वास को और भी कमजोर करने का काम किया। सुरक्षा बलों की इस कारवाई के विरोध में कश्मीर के पुलवामा और शोपियाँ में 2021 के पहले दिन 1 जनवरी को सार्वजनिक जीवन ठप रहा।

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जम्मू-कश्मीर का नया डोमिसाइल कानून: संघर्षों के जन-इतिहास पर सत्ता का नया मुलम्मा

कुछ आलोचकों ने नये डोमिसाइल कानून के अंतर्गत चलायी जाने वाली प्रक्रियाओं की तुलना इज़रायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक की बस्तियों के साथ भी की है।

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तन मन जन: COVID-19 में अंडमान से कश्‍मीर तक मरने को अभिशप्‍त हैं आदिवासी-घुमंतू

वास्तविकता तो यह है कि देश के अन्य राज्यों में जहां कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा रही है वहीं पूर्वोत्तर के प्रदेशों में संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। सरकारी उपेक्षा के बाद अब वहां स्थानीय समुदायों ने इस महामारी से मुकाबला करने के लिए स्वयं पहल शुरू कर दी है।

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इतवार को AIPF मनाएगा ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’, 15 को अन्य संगठनों के साथ साझा संकल्प पत्र

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट राष्ट्रीय आज़ादी आन्दोलन के आदर्शों के अनुरूप एक धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतान्त्रिक भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराता है और भारतीय गणराज्य में जनता की संप्रुभता को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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“बाबरी के बाद प्रगतिशील लोगों ने कश्मीर को मुस्लिम बहुसंख्यक का मुद्दा समझ कर गलती कर दी”!

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने की पहली बरसी पर फिल्मकार संजय काक से जितेंद्र कुमार की बातचीत

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बात बोलेगी: नये युग का करें स्वागत…

बीते तीन दशकों से जिन दो कार्यों के न हो पाने से हिंदुस्तान का बहुसंख्यक समाज खुद को गंभीर रूप से असहाय, निर्बल और हीनताबोध से ग्रसित पा रहा था, आज ऐसा संयोग रचा गया कि दोनों ऐतिहासिक कार्य सम्पन्न होने जा रहे हैं। कश्मीर के सच्चे अर्थों में विलय (जिसे आपने मुकुट के रौंदे जाने के तौर पर ऊपर पढ़ा) की बरसी और राम का भव्य मंदिर।

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कश्मीर एक साल बाद: फिल्मकार संजय काक से एक संवाद

कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटे 5 अगस्त 2020 को एक साल पूरा हुआ। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार ने मशहूर डाक्यूमेंट्री निर्माता फिल्मकार संजय काक से कश्मीर पर बात की।

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