राग दरबारी: कमंडल और मंदिर के बीच दम तोड़ता सामाजिक न्याय

क्या कारण रहा कि एक समय अछूत सी रही भाजपा आज देश में सबसे मजबूत ताकत है? सवाल यह भी है कि जो सामाजिक और राजनीतिक विरासत इतनी मजबूत थी, वह 25 साल के भीतर ही इतनी बुरी तरह क्यों बिखर गयी और हिन्दुत्ववादी ताकतों को क्यों चुनौती नहीं दे पायी?

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आज फूलन देवी को क्यों याद किया जाना चाहिए

सड़ चुके भारतीय समाज में आज़ादी और इंसान और उसमें भी स्त्री होने की कीमत कैसे चुकायी जा सकती है और कितनी चुकानी पड़ सकती है, यह जानना हो तो आपको फूलन के पास जाना ही पड़ेगा। कोई दूसरा रास्ता आपके पास नहीं है।

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स्मृतिशेष: समाजवाद के खांटी पहरुए रामअवधेश सिंह का जाना

बिहार के भोजपुर जिले के एक पिछड़े हुए गांव में 18 जून 1937 को जन्मे रामअवधेश सिंह ने राजनीति में अपने बूते जगह बनाई थी. वह 1969 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में आरा विधानसभा क्षेत्र से चुन कर बिहार विधानसभा आये. 1977 में बिक्रमगंज लोकसभा क्षेत्र से संसद के लिए चुने गए.

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राज्य के बरअक्स मुसलमानों का टूट चुका आत्मविश्वास किसकी देन है?

सवाल है कि आख़िर राज्य के हर संसाधन में नागरिक होने के कारण अपनी हिस्सेदारी के एहसास में कमी मुसलमानों में किन वजहों से आयी है? इसके लिए कौन राजनीतिक शक्तियाँ ज़िम्मेदार हैं?

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