हिन्दुत्व के जनक तो हुगली में हुए, फिर सावरकर की फोटो लगाकर संघ क्या जाली हिन्दुत्व बेचता रहा?

यह बार-बार कहा जाने वाला झूठ है कि हिंदुत्‍व के जनक विनायक दामोदर सावरकर थे। जब चंद्र नाथ बसु हिंदुत्‍व पर किताब लिख रहे थे, तब हिंदू महासभा और बाद में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की बुनियाद डालने वाले महान व्‍यक्तित्‍वों में वरिष्‍ठतम बीएस मुंजे 20 साल के थे, सावरकर महज नौ साल के थे, हेडगेवार तीन साल के थे और गुरु गोलवलकर तो पैदा भी नहीं हुए थे।

Read More

इतिहास के सिलेबस में UGC का किया ताज़ा बदलाव उर्फ RSS का ‘आइडिया ऑफ भारत’

यह पहली बार हुआ है कि यूजीसी ने पूरे का पूरा पाठ्यक्रम ही नए सिरे से गढ़ने की कोशिश की है, जिसमें से विश्वविद्यालय मात्र 20-30 प्रतिशत की ही काट-छांट कर पाएंगे। इससे पहले यूजीसी सिर्फ कुछ सामान्य निर्देश देता था।

Read More

हिन्दुत्व की परिभाषा: ‘दिनमान’ में 8 दिसम्बर, 1968 को छपा कवि-संपादक अज्ञेय का संपादकीय

संघ का ऐब यह नहीं है कि वह ‘हिंदू’ है; ऐब यह है कि वह हिंदुत्व को संकीर्ण और द्वेषमूलक रूप देकर उसका अहित करता है, उसके हज़ारों वर्ष के अर्जन को स्खलित करता है, सार्वभौम सत्यों को तोड़-मरोड़ कर देशज या प्रदेशज रूप देना चाहता है यानी झूठा कर देना चाहता है.

Read More

दक्षिणावर्त: भांग के कुएं में विचारधारा के नाम पर प्रतिक्रियावादी हड़बोंग

संघ कहिए, भाजपा कहिए या भारत का दक्षिणपंथ कहिए- एक वैचारिक लकवे से ग्रस्त प्रतीत होता है। किसी भी परिवर्तनकामी आंदोलन के तीन सिरे होते हैं- आर्थिक, सामाजिक और भारत जैसे देश में धार्मिक। संघ का आर्थिक दर्शन क्या है? स्वदेशी चिल्लाते रहिए, विनिवेश करते रहिए। आप अगर विनिवेश या निजीकरण के पक्ष में आ ही गए हैं, तो उसी को कहिए ना, उस पर कुछ सिद्धांत दीजिए, अपने काडर्स को प्रशिक्षित कीजिए, लेकिन यहां सुर कुछ औऱ है, तान कुछ और है।

Read More

दक्षिणावर्त: आत्मा का सौदा भी काम न आया गोया सारे पाप चेहरे पर नुमायां हो गए…

भाजपा और संघ का चरित्र भी बदल गया है और चाल भी। संघ का अपने आनुषंगिक संगठनों पर जो नैतिक प्रभाव या दबदबा था, वह अब पूरी तरह न्यून या शून्य तक पहुंच गया है। भाजपा में तो संगठन और सत्ता एकमेक हो गए हैं। आप याद करें तो पाएंगे कि अटलजी के समय भी भाजपा अध्यक्ष का एक अलग व्यक्तित्व होता था, लेकिन आज जेपी नड्डा जब अमित शाह या नरेंद्र मोदी से मिलते हैं, तो उनकी देहभाषा देखिए। साफ प्रतीत होता है कि कोई सेल्स एक्जक्यूटिव अपने कंट्री हेड के सामने खड़ा है।

Read More

प्रवासी भारतीयों के संगठनों ने लिखी बिडेन को चिट्ठी, RSS-BJP से किया आगाह

भारतीय जनता पार्टी और राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के रिश्‍तों की ऐतिहासिकता को बताते हुए इस पत्र में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से हुए मानवाधिकार उल्‍लंघनों को गिनवाया गया है। इस संदर्भ में पत्र सोनाली शाह और अमित जानी जैसे व्‍यक्तियों के नाम गिनवाता है जिन्‍होंने हिंदू संगठनों के पक्ष में बयान दिए और वे डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्‍य हैं।

Read More

जिस राष्ट्र में अपने मन-विचार से काम करने की आजादी न हो, उसे नष्ट हो जाना चाहिए: स्वामी विवेकानंद

पिछले कुछ दशकों में खासतौर से 90 के बाद चली धार्मिक कट्टरता की हवा ने विवेकानंद जैसे क्रांतिकारी, संन्यासी और मानवतावादी दार्शनिक को हिंदू पहचान के साथ जड़बद्ध कर दिया. और ध्यान रहे ये सब कुछ सायास, एक परियोजना के तहत किया गया था ताकि हिंदुत्व के खोखले दावे को अमली जामा पहनाने के लिए एक नायक की तलाश पूरी की जा सके.

Read More

तेजी से बढ़ रहा है किसान आंदोलन का राष्ट्रव्यापी आधार

पूरे देश की नज़र कल 30 दिसंबर को 2 बजे विज्ञान भवन में भारत सरकार और 40 किसान संगठनों के बीच बातचीत पर टिकी हुई है ।पहले भी 5 वार्ताएं …

Read More

मुसलमानों पर मोहन भागवत के बयान और दशहरे पर देवबंद दौरे की संभावना में छुपे सूत्र

से दारूल उलूम देवबन्द के सदर मुदर्रिस एवं जमीअत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सैयद अरशद मदनी अचानक संघ के दिल्ली स्थित कार्यालय पर पहुँच गए थे इसी तरह देवबन्द भी एक रोज़ सुर्ख़ियों में आए कि अचानक संघ प्रमुख मोहन भागवत पहुँचे देवबन्द और की मुलाक़ात देवबन्द दारूल उलूम देवबन्द के मोहतमिम सहित अन्य इस्लामिक विद्वानों से। आज के हिसाब से संघ प्रमुख मोहन भागवत का देवबन्द जाना बहुत बड़ी बात होगी।

Read More

चुनावीबिहार-3: ज्यादा दिमाग मत लगाइए, बस महीने भर की बात है…!

भाजपा में कम्युनिकेशन-गैप इतना बढ़ गया है कि अब सरेआम-सरेशाम जूतमपैजार हो रही है, लट्ठ बरस रहे हैं। परसों भाजपाइयों ने पप्पू यादव की जाप (जन अधिकार पार्टी) के कार्यकर्ताओं की तुड़ाई की, तो आज अपने ही मंत्री विजय कुमार सिन्हा के मुर्दाबाद के नारे बुलंद कर दिये।

Read More