तिर्यक आसन: हिन्दी के युवा, अर्ध-वरिष्ठ, वरिष्ठ और ठूँठ!

वरिष्ठता भी एक उपलब्धि है। जिनको ये उपलब्धि मिलती है, वे इसका महत्व जानते हैं। इस उपलब्धि को प्राप्त करने के बाद उनकी मन:स्थिति पर कवि कैलाश गौतम का प्रकाश डालता हूँ- “मनै मन छोहारा मनै मन मुनक्का”।

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तिर्यक आसन: वह तीसरा आदमी कौन है, जो सिर्फ कविता से खेलता है?

साम्राज्यवाद की बाढ़ आई। उनकी भावनाओं का फाटक खुला। एक पंक्ति आई। आलमारी से………। साम्राज्यवाद की बाढ़ सब कुछ तबाह कर चली गई, तब उनकी भावनाओं ने कविता का रूप धरा। शीर्षक- बाढ़ आई है।

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तिर्यक आसन: राष्ट्र चिंता का कॉपीराइट

देश सेवा की योजनाएँ बढ़ने के साथ चहारदीवारी के अंदर की जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ी थी। उर्वरा शक्ति ने घर के भीतर अलग-अलग कोनों में गमलों में उगे पौधों में एकता का संचार किया था। गमलों में उगे पौधों ने एकजुट होकर लॉन का रूप ले लिया था।

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