तिर्यक आसन: कुत्ते, फ़कीरी और कान से सूंघने वाले दीवान जी

शुद्ध फकीर को पालने का जतन नहीं करना पड़ता। वो सर्वहारा की तरह पल जाता है। शुद्ध फकीर समाज की गंदगी साफ करता है। संकर फकीर की गंदगी समाज को साफ करनी पड़ती है।

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तिर्यक आसन: सम्मान की मास्कवादी पढ़ाई उर्फ चरण पुजाई का साहित्य

मैंने टाइम टेबल बनाकर सम्मान की पढ़ाई करने वालों की प्रतिस्पर्धा देखी है। वे टाइम टेबल में सम्मान के घंटों का भी वर्णन लिखते हैं। पढ़ाई का घंटा कम-बेसी हो जाता है, पर सम्मान का घंटा टस से मस नहीं होता- पढ़ाई में हुई कमी चरण पुजाई पूरा कर देगी।

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तिर्यक आसन: अहम ब्रह्मास्मि उर्फ नित्य दुखवादियों के लिए एक अदद सुख

सत्ता शिकायत का ही सुख ‘भोगती’ है। सत्ता चाहे तो एक दिन में ही सभी शिकायतों का अंत कर दे, पर ऐसा कर देने से उस पर नागरिकों की निर्भरता नाममात्र की हो जाएगी। या सत्ता की आवश्यकता ही खत्म हो जाए। सत्ता के लिए शिकायत का सुख छोड़ना उसके अंत की घोषणा है। दोबारा मनुष्य की स्वतंत्रता की शुरूआत है।

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तिर्यक आसन: पूंजीवाद का भूत, ब्राह्मणवाद का मैनेजर और जजमान क्रांतिकारी का लोटा

पूँजीवाद और भूत के बीच बाप-बेटे का रिश्ता है। भूत के खून में पूँजीवाद है। पूँजीवाद ने अपने ‘मैनेजर’ ब्राह्मणवाद की आर्थिक तरक्की के लिए कई उत्पादों की रचना की है। भूत उन उत्पादों में से एक है।

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तिर्यक आसन: आत्मा से ब्रह्म तक पसरा श्रेष्ठता का भूत

आधुनिक कथाओं में मानवताविरोधियों को चकमा देने वाले पात्रों की संख्या अत्यधिक है, जो अपने प्राण और आत्मा को शरीर से बाहर रखते हैं। आधुनिक दौर के ऐसे पात्र रियल स्टेट, फिल्म निर्माण, मीडिया इंडस्ट्री, धर्म आदि नामक गुल्लक में धन नामक अपने प्राण को सुरक्षित रखते हैं। गुल्लक में प्राण सुरक्षित रखने के बाद चिंता हुई, आत्मा कहाँ छुपाकर रखी जाए।

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तिर्यक आसन: भला-चंगा पगुराता विमर्शकार और बीमार विमर्श

पहले वक्ता के रूप में जैसे ही सुधारक ने माइक थामी, लगा जेठ की दोपहर में तपते वन पर रिमझिम-रिमझिम, रुमझुम-रुमझुम होने लगी। बारिश के इंतजार में भूमिगत हुए दादुर टर्राते हुए बाहर आ गए।

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तिर्यक आसन: उसी को हक़ है जीने का जो इस ज़माने में, इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए!

कर्ज लेना भी एक उपलब्धि है। बशर्ते कि कर्ज लाखों-करोड़ों में हो। उसी कर्ज से खरोंच, फ्रैक्चर बन जाती है। कर्ज अगर बैंक की कृपा से एनपीए घोषित हो जाये, तो खरोंच, सेप्टिक जितनी घातक हो सकती है। टाँग काटने की नौबत आ सकती है। ऐसी खरोंच राष्ट्रीय ब्रेकिंग बनेगी- ध्यान से देखिए…।

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तिर्यक आसान: जुगाड़ीज़ फ्रॉम सिएमा विन डिजाले! या या या…

फंडिंग के स्रोत का पता चलने के बाद, हो सकता है अजीत डोभाल सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दें- किसानों को फंड धरती दे रही है। हलफनामे के आधार पर सुप्रीम कोर्ट धरती को अदालत में हाजिर होने की तारीख मुकर्रर कर दे। दो-तीन तारीखों पर हाजिर न होने पर अदालत अपनी अवमानना मान धरती की कुर्की का आदेश सुना दे।

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तिर्यक आसन: फ़ोटो-पोस्टर में जीवन काटती कमबलियों की आवारा फौज

आवारा फौज के कुछ सदस्य भोजन करने जाते हैं, अछूतों के घर। जब वे अछूतों के घर भोजन करने जाते हैं, तब अखबार में उनकी उदारता, सहिष्णुता के फोटो आते हैं। अगले दिन ‘फैक्ट चेक’ भी आता है- भोजन बाहर से मंगवाया गया था।

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तिर्यक आसन: परिवार और सामुदायिकता में लगा परजीवी स्टेट का कीड़ा

अपने प्रतिनिधियों की सरकार और अपने आविष्कारों पर जनता की निर्भरता देख स्टेट चिंतामुक्त हो गया है। हमारी चेतना पर वो तमाम पट्टियाँ बाँध चुका है। एक पट्टी खुलती है, तब तक राजनीति और धर्म के प्रतिनिधियों के सहयोग से नई पट्टी बाँध देता है।

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