संवैधानिक मूल्यों पर चलता संवेदनशून्य राजनीति का बुलडोज़र

देश का संविधान अपने स्वरूप में पूरी तरह से “राष्ट्रवादी” है जिसके पालन में ही देश का भविष्य है। किसी भी राजनीतिक दल का समर्थक या विरोधी हुआ जा सकता है, लेकिन यह भी याद रखने की जरूरत है कि जनता से राजनीतिक पार्टियों का वजूद तय होता है, न कि राजनीतिक पार्टियों से जनता का अस्तित्व।

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बात बोलेगी: लोकतंत्र का ‘बुलडोज़र’ पर्व

देश के अलग अलग हिस्सों में पाये जाने वाले बुलडोजरों को देखते हुए तो यही लगता है कि देश का विकास अगर कल को वाकई होता है तो उसमें किसी भी सरकार से ज़्यादा और बड़ा योगदान बुलडोज़र का ही होगा। विकास के कई-कई मकसदों और उद्देश्यों में बुलडोजर की सार्वभौमिक उपस्थिति ही अब एक मात्र सत्य है।

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