आगरा: दुनिया की बदलती तस्वीर और भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात पर व्याख्यान

डॉ.  जया मेहता ने कहा कि यह डॉलर वाले 220 अरबपति और जी-7 के देश हमारी पहचान नहीं हैं। हमारे लोग ही हमारी पहचान हैं और वे 95 फ़ीसदी ग़रीब हैं। पहले कांग्रेस और अब भाजपा के शासनकाल में जो आर्थिक नीतियाँ देश में अपनायी गईं हैं, उनसे अमीर-ग़रीब की खाई बहुत तेज़ी से चौड़ी हुई है। जितनी ज़्यादा ग़ैर बराबरी हमारे देश में बढ़ती जा रही है, उससे किसी भी समाज में शांति और स्थायित्व हो ही नहीं सकता। 

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ईरान युद्ध से बहुध्रुवीय दुनिया का मार्ग हुआ मज़बूत

भले ही अमेरिकी वर्चस्व अभी पूरी तरह इतिहास न बना हो, किंतु ईरान-चीन-रूस का यह नया रणनीतिक गठबंधन, वैश्विक दक्षिण गोलार्ध की बढ़ती आवाज़ और बहुध्रुवीय संस्थाओं का सशक्तिकरण, उस वर्चस्व की नींव खोद रहे हैं

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भोपाल : वैश्विक वित्तीय और आर्थिक संकट तथा उभरते विकल्पों पर परिचर्चा

‘जोशी-अधिकारी इस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज़’, ‘हम सब’ और ‘गांधी भवन’ द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में श्रोताओं की उपस्थिति उत्साहजनक रही, जिनमें राजेश जोशी, कुमार अम्बुज, राम प्रकाश त्रिपाठी, पलाश सुरजन, आरती, बालेंदु परसाई, शैलेंद्र शैली, सुधीर सजल, उपासना बेहार, स्मिता सत्यमेव आदि शामिल रहे।

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दुनिया को चाहिए अमन लेकिन मुनाफाखोरों को जंग चाहिए: विनीत तिवारी

वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता कॉमरेड रमेश मिश्रा के पंचम स्मृति दिवस पर 17 जून 2025 को आगरा में आयोजित गोष्ठी का विषय था, “दुनिया को चाहिए अमन तो जंग किसे चाहिए: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलाव”। 

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