जंग के बीच सेनापति से इस्तीफे की मांग अनैतिक और अव्यावहारिक क्यों है

प्रधानमंत्री अगर स्वयं भी इस्तीफ़े की पेशकश करें तो हाथ जोड़कर उन्हें ऐसा करने से रोका जाना चाहिए। उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया तो वे नायक हो जाएंगे, ‘राष्ट्रधर्म’ निभा लेने के त्याग से महिमामंडित हो जाएंगे और किसी अगली और भी ज़्यादा बड़ी त्रासदी के ठीक पहले राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए पुनः उपस्थित हो जाएंगे।

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“स्वाभिमान को ताक पर रख के मैं हाथ जोड़ती हूं, आप कुर्सी से हट जाइए”!

अगर आप पद से नहीं हटते हैं तो हम में से लाखों लोग बिना किसी वजह के मारे जाएंगे। इसलिए अब आप जाइए। झोला उठा के। अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए। ध्यान करते हुए और एकांतवास में आप अपनी आगे की जिन्दगी सुकून से जी सकते हैं।

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भारत, पूंजीवाद, राष्ट्रवाद, साहित्य और राजनीति पर अरुंधति रॉय से सात सवाल

किसी नदी को आप विषमुक्‍त कैसे करते हैं? मेरे खयाल से, विष खुद-ब-खुद उसमें से निकल जाता है। बस, बहती हुई धारा अपने आप ऐसा कर देती है। हमें उस धारा का हिस्सा बने रहना होगा।

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शांति के लिए कोरिया का प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्‍कार LLPP इस साल अरुंधति रॉय को

इस साल शांति के लिए ली हो छ साहित्यिक पुरस्‍कार (एलएलपीपी) के लिए चयन समिति ने अरुंधति रॉय को इसलिए चुना क्‍योंकि ‘’रॉय की साहित्यिक चेतना इस मामले में लेखक ली हो छ के समांतर है कि उन्‍होंने भारत की समस्‍याग्रस्‍त चेतना के इतिहास में निरंतर शांति के लिए प्रयास किया है।‘’

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