शूद्र, बहुजन, दलित: OBC की सही पहचान के लिए एक सही शब्द की तलाश पर बहस

। हमारे भारतीय समाज में केवल आर्थिक उत्पीड़न ही नहीं होता बल्कि जातिगत उत्पीड़न के साथ शोषण कई गुना बढ़ जाता है। यही सवाल बाबा साहेब अम्बेडकर को भी जीवनपर्यंत परेशान करते रहे। उन्होंने अपने समय के सवालों से जूझते हुए भविष्य के संघर्षों के लिए जो बात कही है वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

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दलित राजनीति की त्रासदी को इसका स्वर्णिम युग कहना मसखरापन है!

जिन दलित पार्टियों ने जाति की राजनीति को अपनाया था वे भाजपा के हाथों बुरी तरह से परास्त हो चुकी हैं क्योंकि उनकी जाति की राजनीति ने भाजपा फासीवादी हिन्दुत्व की राजनीति को ही मजबूत करने का काम किया है।

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बहुजन समाज के आईने में COVID-19 से बनती दुनिया और कार्यभारों का एक अध्ययन

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और विश्व असमानता डेटाबेस, पेरिस के सह-निदेशक थॉमस पिकेटी का अनुमान है कि 2020 की यह कोविड-19 महामारी दुनिया के अनेक देशों में बड़े परिवर्तनों का वाहक बनेगी। मुक्त-व्यापार और बाजार की गतिविधियों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाये जाने संबंधी विमर्श को चुनौती मिलेगी और इनकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की मांग समाज से उठेगी।

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बहुजन समाज के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद करने की तैयारी है ऑनलाइन ओपेन बुक परीक्षा

जब भारत का कमजोर और बहुजन तबका भयानक त्रासदी से गुजर रहा है तब उनके बच्चों को ऑनलाइन ओपेन बुक परीक्षा देने को कहा जा रहा है

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