राग दरबारी: क्या सरकार इतनी अराजकता चाहती है कि अबकी आसानी से शहर वापस ही न जाएं मजदूर!

अगर सरकार चाहती तो आसानी से हर दिन पौने दो करोड़ लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचा सकती थी

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राग दरबारी: विकास के वैकल्पिक मॉडल पर भारत में चर्चा क्यों ठप है?

हमारे देश के अधिसंख्य ‘बुद्धिजीवी’ इसी मोड में हैं कि उन्हें आज भी यह कहने में कोई गुरेज़ नहीं है कि मोदी जी के नेतृत्व में ही कोरोना से जंग जीती जा सकती है!

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राग दरबारीः पंत से लेकर अंत तक राजसत्ता की मज़हबी जंग के सात दशक

पॉल ब्रास के अनुसार, पंडित पंत की नीति का ही यह परिणाम था कि आने वाली आधी शताब्दी तक मुसलमानों की भागीदारी उत्तर प्रदेश की सरकारी सेवाओं और पुलिस में लगातार कम होती चली गयी.

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राग दरबारीः कोरोना की पीठ पर चढ़कर महाराष्ट्र की सरकार को निपटाने की तैयारी

यहां सवाल सिर्फ संवैधानिक संकट से बचने का नहीं है और जिसे हम सिर्फ एक मुख्यमंत्री के किसी सदन के सदस्य न बनने के रूप में देख रहे हैं, वह इतनी छोटी बात नहीं है. अगर इसे बड़े फलक पर देखें तो पता चल सकता है कि यह संकट क्यों इतना गहरा है.

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राग दरबारीः एक ‘टोमैटो इंटेलेक्चुअल’ पर बंदिश लगाने और टमाटर-मिर्च की दमड़ी वसूलने वाला मीडिया

हकीकत तो यह है कि रामचंद्र गुहा के इस लेख से ज्यादा गंभीर अल्पना किशोर का लेख है. फिर भी हिन्दुस्तान टाइम्स ने उस लेख को छापने से मना कर दिया.

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