हर जनसंहार दास्तान-ए-लापता है! भोपाल गैस कांड की याद में एक कविता, एक शिल्प

2-3 दिसंबर, 1984 को घटित इस जघन्य कांड के पचीसवें वर्ष प्रकाश चन्द्रायन ने ‘राष्ट्रीय स्मृतिलोप’ शीर्षक से लंबी कविता रची और गोपाल नायडू ने एक मूर्तिशिल्प ‘भोपाल गैस काण्ड’ शीर्षक से रचा था। कविता 2017 में जारी हुई।

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वियना में सपना उर्फ़ न्यूक्लियर डील के सोलह साल

18 जुलाई 2005 को हिन्दुस्तान नाम की ‘तूफ़ान से निकालकर लायी कश्ती’ ने खुद को ऐसे ग्लोबल जहाज से जोड़ लिया जिसे हांकने का तरीका, रफ़्तार, ईंधन और तासीर सब कुछ काफी अलग था। और इसलिए इस ‘डील’ के बाद देश की राजनीति, समाज और हमारी सामूहिक नैतिकता में कई खामोश लेकिन दूरगामी परिवर्तन संपन्न हुए, जिनमें से कुछ की शुरुआत नब्बे के दशक के व्यापार समझौतों से हुई थी।

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