गाज़ा: नरसंहार के 1000 दिन और कुर्बानियों की दास्तानें

काव्यात्मक शुरुआत के बाद सभा को कुछ कड़वे और कठोर तथ्यों तथा मुनाफ़े की भूखी साम्राज्यवादी ताकतों के छिपे हुए राजनीतिक मंसूबों से अवगत कराया गया, जिनके कारण फ़िलिस्तीन की सुंदर धरती और जीवन, तबाही और संकट में बदल गया है। गोआ से आए वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रंजन सोलोमन इस दिन के मुख्य वक्ता थे।

Read More
AI Generated Image

ईरान युद्ध से बहुध्रुवीय दुनिया का मार्ग हुआ मज़बूत

भले ही अमेरिकी वर्चस्व अभी पूरी तरह इतिहास न बना हो, किंतु ईरान-चीन-रूस का यह नया रणनीतिक गठबंधन, वैश्विक दक्षिण गोलार्ध की बढ़ती आवाज़ और बहुध्रुवीय संस्थाओं का सशक्तिकरण, उस वर्चस्व की नींव खोद रहे हैं

Read More

दिल्‍ली: फलस्तीन, ज़ायोनी-साम्राज्यवादी प्रभुत्व, और बदलती भू-राजनीति पर चर्चा

डॉ. क़मर आगा ने स्थिति की ऐतिहासिकता और अमेरिका और इज़राइल की विस्तारवादी नीति के षड्यंत्रों को ज़ाहिर किया। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी शक्ति के माध्यम से अमेरिका और इज़रायल दशकों से दूसरे देशों में हस्तक्षेप कर अपना विस्तार कर रहे हैं। ज़ायोनी शासन बाइबिल में उल्लेखित भू-भागों में बसने की अपनी ‘ग्रेटर इज़राइल’ योजना पर निर्माण का और उन इलाक़ों पर कब्ज़ा कर अपने में मिलाने का काम कर रहा है।

Read More

फ़लस्तीन के साथ खड़ा होना इंसानियत का तकाज़ा: फ़लस्तीन यात्रा से लौटे विनीत तिवारी

फ़लिस्तीनियों को मानव अधिकारों से वंचित रखकर दुनिया भर से मौकापरस्त यहूदियों और अन्य धर्मों के लोगों को फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसाया गया है। इज़रायल में अमेरिकी समर्थन से ये लोग ऐश का जीवन जी रहे हैं। शेष आबादी, फ़लस्तीन के मूल निवासी, ईसाई और मुसलमान दोनों ही प्रताड़ित और अपमानित जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं।

Read More

दुनिया को चाहिए अमन लेकिन मुनाफाखोरों को जंग चाहिए: विनीत तिवारी

वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता कॉमरेड रमेश मिश्रा के पंचम स्मृति दिवस पर 17 जून 2025 को आगरा में आयोजित गोष्ठी का विषय था, “दुनिया को चाहिए अमन तो जंग किसे चाहिए: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलाव”। 

Read More

हमारी समस्या है नागरिक आज्ञाकारिता ! ‘बुलडोजर न्याय’ के दौर में हावर्ड जिन की याद

आज जब हमारे मुल्क में बुलडोजर (अ)न्याय का सामान्यीकरण हो चला है और संवैधानिक संस्थाएं भी इस मामले में औपचारिक कार्रवाई के आगे कदम नहीं उठाती दिख रही हैं, ऐसे समय में जनमानस को जगाने के लिए, उन्हें प्रेरित करने के लिए वे सभी जो न्याय, अमन और प्रगति के हक़ में हैं, उन्हें नई जमीन तोड़ने की जरूरत है। 

Read More

ग़सान कनाफ़ानी: फ़िलिस्तीन मुक्ति संघर्ष का राइटर और फाइटर

कनाफ़ानी ने जितना लिखा, उसका अभी तक कुछ अंश ही हासिल किया जा सका है। उन्होंने अनेक अखबारों में लिखा। अनेक नामों से लिखा। उनके लिए लेखन अपना नाम बनाने का नहीं, बल्कि फ़िलिस्तीन की आज़ादी के मक़सद को हासिल करने के लिए तर्क का औजार था, दुश्मन के ख़िलाफ़ मोर्चा था और लोगों को लामबंद करने की पुकार थी।

Read More

इजरायली रंगभेद अफ्रीका से अधिक खतरनाक है: इरफान इंजीनियर

इजरायल फलस्‍तीन युद्ध 1948 से जारी है, जब यूरोपीय देशों ने इंग्लैंड के संरक्षण में इजरायल राष्ट्र की स्थापना की थी। सारी दुनिया से यहूदियों को बुलाकर फलस्‍तीन में बसाया गया और वहां के मूल निवासियों को अपना ही देश छोड़ने पर विवश किया गया।

Read More

साहित्य में साम्राज्यवाद और विस्थापन की तलाश: संदर्भ इजरायल-फिलिस्तीन संकट

साम्राज्यवाद को दो पैमानों से पहचाना जा सकता है। पहला यह कि शोषक ताकतें किसी दूसरे देश पर कब्जा करके यानि उसे उपनिवेश बनाकर उस देश के उद्योगों को खत्म कर देती हैं और दूसरा उस देश की उपज और उत्पादन को जबरदस्ती हड़पती जाती हैं।

Read More