फ़्रंट पैक पर चेतावनी लेबल के लिए तैयार है भारतीय खाद्य उद्योग

भारतीय खाद्य उद्योग, जो इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य साझेदार हैं, एक ऐसे लेबल को अपनाने के लिए तैयार है जो देश के लिए सबसे अच्छा है और उपभोक्ता अनुकूल लेबल है। इससे भारतीय परिवारों को स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद मिलेगी और साथ ही हमारे उद्योग भी ज़्यादा नौकरी सृजित कर सकेंगे।

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उद्योग जगत ने विज्ञान आधारित खाद्य पैकेजिंग पर चेतावनी लेबल का दिया समर्थन

वरिष्ठ सांसदों, उद्योग प्रतिनिधियों और सिविल सोसायटी का यह संवाद ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रीय व अन्तर्राष्टीय स्वास्थ्य और पोषण विशेषज्ञ एफएसएसएआई से ‘हेल्थ स्टार रेटिंग’ की बजाय ‘चेतावनी लेबल’ को एफओपीएल के तौर पर लागू करने की मांग कर रहे हैं, जो कई वैज्ञानिक शोध और अध्य्यन पर आधारित है।

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असंचारी रोगों से होने वाली मौतों को रोकने और FOPL लागू करने के लिए NHRC की ऐतिहासिक पैरवी

भारत लगभग 15 मिलियन मोटे बच्चों का घर है। यह चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। औसतन 15 प्रतिशत भारतीय बच्चे किसी न किसी रूप में मोटापे का सामना कर रहे हैं।

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अपने बच्चों को मोटापे और रोगों से मुक्त रखने के लिए पैकेट पर ‘चेतावनी लेबल’ की मांग उठानी होगी!

मस्तिष्क की कार्य क्षमता आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन पर निर्भर करती है। यह आपके शरीर और मस्तिष्क को अवसाद और तनाव की ओर ले जाता है। साथ ही अमिनो एसिड की पर्याप्त मात्रा न होने के कारण भी आप अवसादग्रस्त हो सकते हैं।

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बनारस के मुसहर गांवों में चिंता का सबब बन रहा है कुपोषण का दोहरा बोझ

यदि कुपोषित बच्चों को उनके आरंभिक जीवन में अपर्याप्त पोषण प्राप्त होता है, तो ऐसे बच्चों को कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण एनसीडी का ज्‍यादा खतरा होता है बजाय उनके जो पर्याप्त पोषण प्राप्त करते हैं। अवरुद्ध बच्चे, बाद में जीवन में यदि सामान्य पौष्टिक भोजन के बजाय उच्च वसा, नमक और चीनी वाले अनियमित अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन और पेय का सेवन करते हैं, तो मोटापे के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं और बाद में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों जैसे असंचारी कार्डियो-वैस्कुलर रोगों में एक या अन्य रूप का उन्‍हें सामना करना पड़ सकता है।

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‘गुड फॉर इंडिया’ अभियान में बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए PIPAL तले साथ आए सभी राजनैतिक दल

भारत में आहार संबंधी गैर संचारी रोग (डीआर-एनसीडी) बढ़ रहे हैं, जिससे लाखों बच्चों को खतरा हो रहा है। दुनिया में कुपोषित बच्चों की सबसे बड़ी संख्या वाला देश भारत लगभग 1.5 करोड़ मोटे बच्चों और 45 मिलियन अविकसित बच्चों का घर है।

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बच्चों का स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अलीगढ़ से उठी पैकेज्ड भोजन के खिलाफ आवाज

यूरो-मॉनिटर डेटा के पूर्वानुमान के अनुसार चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत सन 2020 तक दुनिया में पैकेज्ड फूड के लिए तीसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में उभरने के लिए तैयार था। अध्ययनों से पता चला है कि भारत में शहरी और ग्रामीण घरों में 53% बच्चों ने चिप्स और इंस्टेंट नूडल्स जैसे नमकीन पैकेज्ड फूड का सेवन किया, 56% बच्चों ने चॉकलेट और आइसक्रीम जैसे मीठे पैकेज्ड फूड का सेवन किया और 49% बच्चों ने चीनी-मीठे पैकेज्ड पेय का सेवन किया- सप्ताह में औसतन दो बार से अधिक।

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असंचारी रोगों (NCD) से होने वाली मौतों पर केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव को NHRC का नोटिस

राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जनपथ पर प्रकाशित एक स्‍तम्‍भ के आधार पर दायर की गयी याचिका का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य सचिव को एक नोटिस भेजा है और चार सप्‍ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामला पैकेज्‍ड खाद्य पदार्थों के कारण होने वाले असंचारी रोगों से जुड़ा है जो देश में हो रही असमय मौतों का एक बड़ा कारण है।

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स्वस्थ भोजन के बच्चों के अधिकार की रक्षा के लिए बनारस में उगा ‘पीपल’!

वाराणसी के संकट मोचन मंदिर के महंत और आईआईटी-बीएचयू के इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को मोटापे और घातक बीमारियों की चपेट में आने से बचाने की तत्काल जरूरत है।

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