Open Space

View All

COVID-19 से लड़ने के लिए शून्य उत्सर्जन की सूची में दिल्ली समेत भारत के तीन शहर शामिल: UN

संयुक्त राष्ट्र के रेस टू जीरो अभियान की तर्ज़ पर यह शहर और उद्योग 2050 तक शून्य-कार्बन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने की दौड़ में हैं। रेस टू जीरो अभियान, 2040-50 के दशक में शून्य उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध स्थानीय सरकारों, व्यवसायों, निवेशकों और अन्य लोगों का सबसे बड़ा गठबंधन है।

Voices

View All

खरीफ फसलों का घोषित समर्थन मूल्य किसानों की मेहनत पर डकैती- किसान सभा

किसान सभा ने कहा है कि पिछले वर्ष की तुलना में इन फसलों की कीमतों में मात्र 2% से 6% के बीच ही वृद्धि की गई है, जबकि इस अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई में 10% और डीजल की कीमतों में 15% की वृद्धि हुई है और किसानों को खाद, बीज व दवाई आदि कालाबाज़ारी में दुगुनी कीमत पर खरीदना पड़ा है।

Editor’s Choice

View All

स्‍मृतिशेष: सियासी कुटिलताओं के बीच एक सदाशय ‘योद्धा संत’ के पांच दशक

वह बहुत निश्छल स्वभाव के और विशुद्ध मानवतावादी थे। सबसे ‘बना’ कर रखते थे। नक्सलवादियों से भी मधुर संबंध और वाजपेयी या मुरली मनोहर जोशी या गोपीनाथ मुंडे से भी मधुर संबंध।

Lounge

View All

COVID-19: सांख्यिकी, विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना पर एक जिरह

कोविड से होने वाली मौतों से संबंधित आधिकारिक आँकड़े किस क़दर झूठे और भ्रामक हैं, इसके प्रमाण अन्य अध्ययनों में भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन ने स्वीकार किया है कि उसके आँकड़े अतिशयोक्तिपूर्ण थे। आँकड़ा जमा करने की ग़लत पद्धति के कारण उन लोगों की मौत को भी कोविड से हुई मौत में जोड़ दिया गया जिनकी मौत की मुख्य वजह कुछ और ही थी।

COLUMN

View All

राग दरबारी: संपादक से सभापति के बीच ठाकुर हरिवंश नारायण सिंह के करतब

क्या सचमुच वे सारे के सारे बुद्धिजीवी व सामाजिक कार्यकर्ता इतने भोले थे/हैं कि उन्हें संपादक हरिवंश की कमी नजर नहीं आयी? और तो और, जब उन्हें नीतीश कुमार ने राज्यसभा में मनोनीत किया तब भी इन समझदार लोगों को समझ में नहीं आया कि हरिवंश कितने शातिर खिलाड़ी रहे हैं?

Review

View All

भाषणों के आईने में लालू प्रसाद यादव

लेखक और संपादक अरुण नारायण ने सदन में दिये गये लालू प्रसाद के भाषणों का एक प्रतिनिधि संकलन निकाला है। इनकी इस प्रकाशित किताब का नाम ‘सदन में लालू प्रसाद: प्रतिनिधि भाषण’ है। यह किताब दिल्ली के ‘द मार्जिनलाइज्ड पब्लिकेशन’ ने प्रकाशित की है। अरुण नारायण ने इस किताब के भीतर लालू प्रसाद के भाषणों को बड़ी सूझ-बूझ और बौद्धिकता के साथ सात खण्डों में संपादित किया है।

Blog

View All

20/9/20: “अख़बार नहीं, आंदोलन” करने वाले एक संपादक की मौत का दिन

आज जब कृषि विधेयक पर ध्वनि मत से मतदान हो रहा था तो हरिवंश जी की निगाहें बिल के पन्ने पर थींं। आज एक जो अजब सी बात हुई वह यह थी कि मतदान कराते वक्त उन्होंने सदन की ओर आँख उठाकर नहीं देखा कि किसने बिल के समर्थन में हाँ कहा और किसने नहीं?