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‘गणतंत्र दिवस परेड’ में किसी भी ‘असामाजिक तत्व’ को इसमें घुसपैठ करने की अनुमति नहीं: दर्शन पाल

परेड आउटर रिंग रोड पर होगी। परेड में वाहनों में झांकियां शामिल होंगी जो ऐतिहासिक क्षेत्रीय और अन्य आंदोलनों के प्रदर्शन के अलावा विभिन्न राज्यों की कृषि वास्तविकता को दर्शाएंगी। सभी किसान वाहनों पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज को फहराएंगे और इसमें किसान संगठन के झंडे भी। किसी भी राजनीतिक पार्टी के झंडे को अनुमति नहीं दी जाएगी।

Voices

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MP: महिला किसानों पर केंद्रित 12 सूत्रीय माँगपत्र जिला कलेक्ट्रेट पर सौंपेगी किसान संघर्ष समिति

किसानों के लिए जो भी योजनाएं बनाई जाती है वे महिला किसानों तक नही पहुँच पाती हैं। न ही उन योजनाओं का लाभ स्वतंत्र रूप से महिला किसानों को नही मिल पाता है। इस स्थिति को बदलने के जरूरत है, इस कारण से अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति-संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वाधान में किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित महिला किसान दिवस 18 जनवरी 2021 आयोजित किया जा रहा है।

Editor’s Choice

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किसान आंदोलन ने आत्मनिर्भरता की असली लड़ाई का रास्ता खोल दिया है!

क्या सरकार शेयर बाजार में होने वाले लेन-देन पर मात्र 0.5% का टर्नओवर टैक्स लगाकर आत्मनिर्भरता कर नहीं लगा सकती और इसके जरिए 4-5 लाख करोड़ रुपये सालाना नहीं वसूल सकती है? जबकि 1% के आत्मनिर्भरता कर के माध्यम से किसानों की मांग और गरीब भारत को व्यापक खाद्य सुरक्षा प्रदान करने से जुड़ी तमाम लागतों से भी अधिक राजस्व की वसूली हो सकती है।

Lounge

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मेरी यादों में मंगलेश: पांच दशक तक फैले स्मृतियों के कैनवास से कुछ प्रसंग

एक दिन पहले ही मैंने फोन पर किसी का इंटरव्यू किया था और फोन का रिकॉर्डर ऑन था। दो दिन बाद मैंने देखा कि मेरी और मंगलेश की बातचीत भी रिकॉर्ड हो गयी है। उसे मैंने कई बार सुना- ‘‘आनंद अभी मैं मरने वाला नहीं हूं’’ और सहेज कर रख लिया।

COLUMN

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पंचतत्व: आखिरकार सबसे बड़ी अदालत में यमुना की सुनवाई

केन्द्रीय जल आयोग का प्रस्ताव कहता है कि यमुना धारा के मध्य बिन्दु और एकतरफ के पुश्ते के बीच की दूरी कम-से-कम पांच किमी रहनी चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि मेट्रो, खेलगांव, अक्षरधाम जैसे सारे निर्माण सुरक्षा से समझौता कर बनाए गए हैं.

Review

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नगेन्द्रनाथ गुप्त: एक पुरखा पत्रकार का बाइस्कोप

करीब पौने दो सौ साल पहले जन्मे नगेन्द्रनाथ गुप्त देश के पहले बड़े पत्रकारों में एक थे और उन्होंने 1857 के बाद से लेकर गांधी के उदय के पूर्व का काफी कुछ देखा और बताया है. वे ट्रिब्यून के यशस्वी सम्पादक थे तो रवीन्द्रनाथ के दोस्त और विवेकानन्द के क्लासमेट.

Blog

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‘आज नहीं तो कल, लोग फट पड़ेंगे’: दो फर्जी मुठभेड़ों और हत्याओं के बाद कश्मीर

घाटी में अविश्वास का माहौल तो पहले से ही था। फर्जी मुठभेड़ की इन दो घटनाओं ने पुलिस और आम जनता के बीच के विश्वास को और भी कमजोर करने का काम किया। सुरक्षा बलों की इस कारवाई के विरोध में कश्मीर के पुलवामा और शोपियाँ में 2021 के पहले दिन 1 जनवरी को सार्वजनिक जीवन ठप रहा।