Open Space

View All

UGC की CARE लिस्टेड पत्रिकाएं: अकादमिक जगत में भ्रष्टाचार की नर्सरी

यूजीसी CARE लिस्ट सिर्फ एक कोटापूर्ति बन कर रह गई है। आए दिन यह भी शिकायतें मिलती हैं कि फलां विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में शोधार्थियों को बाध्य किया जा रहा है कि वे अपने शोध-पत्र का प्रकाशन यूजीसी लिस्ट में शामिल पत्रिकाओं में करवाएं। अब शोधार्थी के पास पैसे देने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है।

Voices

View All

कॉर्पोरेट लूट, दमन और विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्षों का सम्मेलन नौ प्रस्तावों के साथ सम्पन्न

रायपुर के पेस्टोरल सेंटर में भूमि अधिकार आंदोलन एवं छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के बैनर तले जल-जंगल-ज़मीन की कॉर्पोरेट लूट, दमन और विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्षों के एकदिवसीय राज्य सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व सांसद हनन मोल्लाह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन में आए वक्ताओं ने देश में जल-जंगल-ज़मीन और जनतंत्र की कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

Editor’s Choice

View All

‘अग्निपथ’ का दूसरा सिरा संघ के निजी सैनिक स्कूलों तक जाता है इसलिए सवाल योजना की मंशा पर है!

पिछले तीन साल के दौरान देश में घटनाक्रम इतनी तेज़ी से बदला है कि न तो मीडिया ने संघ के शिकारपुर आर्मी स्कूल की कोई सुध ली और न ही अखिलेश ने ही बाद में कुछ भी कहना उचित समझा। अब ‘अग्निपथ’ के अंतर्गत साढ़े सत्रह से इक्कीस (बढ़ाकर तेईस) साल के बीच की उम्र के बेरोज़गार युवाओं को ‘अग्निवीरों’ के रूप में सशस्त्र सेनाओं के द्वारा प्रशिक्षित करने की योजना ने संघ के आर्मी स्कूल प्रारम्भ किए जाने के विचार को बहस के लिए पुनर्जीवित कर दिया है।

Lounge

View All

भारत क्या है? राज्यों का संघ या एक राष्ट्र?

आधुनिक युग में सामान्य रूप से राष्ट्र शब्द इंग्लिश शब्द नेशन का हिंदी रूपांतर माना जाता है। राष्ट्र, राज्य, राष्ट्रीयता, संघ सब अलग-अलग शब्द हैं, उनके अलग-अलग अर्थ हैं और उनकी अलग-अलग व्याख्याएं हैं, यह सभी समानार्थी नहीं हैं। सामान्यतया राष्ट्र और राज्य को एक मान लिया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग हैं।

COLUMN

View All

संक्रमण काल: इस देश में मौत की भी जाति होती है!

इस शोध से सामने आए तथ्यों से भारत में मौजूद भयावह सामाजिक असमानता उजागर होती है तथा हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे विकास की दिशा ठीक है। क्या सामाजिक रूप से कमजोर तबकों के कथित कल्याण के लिए राज्य द्वारा उठाए गए कदम पर्याप्त हैं?

Review

View All

एक सत्यशोधक के रूप में जोतिबा फुले की तस्वीर: देस हरियाणा का भाषणों को समर्पित अंक

अब तक हिंदी पाठकों के दिमाग में बनी जोतिबा फुले की तस्वीर एक समाज सुधारक की तस्वीर या फिर एक जातिवाद विरोधी महात्मा की तस्वीर के रूप में बनी हुई है। ये भाषण जोतिबा फुले के दर्शन, विज्ञान और इतिहास के सत्यशोधक की तस्वीर बनाते हैं। यह भाषण पहली बार मराठी में 1856 में प्रकाशित हुए थे।

Blog

View All

नागार्जुन की कविता का भावलोक

जो लोग राजनीति और साहित्य में सुविधा के सहारे जीते हैं वे दुविधा की भाषा बोलते हैं। नागार्जुन की दृष्टि में कोई दुविधा नहीं है। यही कारण है कि खतरनाक सच साफ बोलने का वे खतरा उठाते हैं।