Open Space
View All
महाराष्ट्र: सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों की पुनर्वास बस्ती में विकल्प की धुन
नर्मदा नवनिर्माण अभियान द्वारा चलाए जा रहे, ये स्कूल कभी भी सरकारी शिक्षा का स्थायी विकल्प बनने के लिए नहीं बनाए गए थे। वे उस खालीपन के जवाब में पैदा हुए, जिसे राज्य ने छोड़ दिया था। आज मध्य प्रदेश, और महाराष्ट्र के जलसिंधी, जीवन नगर, सवारिया दीगर, भाभरी, थुवानी, मणिबेली और मध्य प्रदेश के खरया भादल गांव में साथ जीवनशालाएँ चल रही हैं।
Voices
View All
चला गया चौरंगी का रखवाला: स्मृतिशेष मणिशंकर मुखर्जी
आज जब उनके जाने की खबर फैल रही है, तो शाहजहां होटल की छवि मन में लौटती है। गलियारे शायद थोड़े धुंधले हैं। मेज़ पर घंटी रखी है। लिफ्ट अब भी चल रही है। पात्र अब भी बहस कर रहे हैं। यही साहित्य का विरोधाभास है। सर्जक चला जाता है, सृजन रह जाता है।
Editor’s Choice
View All
नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!
इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.
Lounge
View All
छह दशक से कविता के ‘अंधेरे में’ भटकता मुक्तिबोध का कहानीकार
मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया में कविता चूंकि कहानी लिख पाने में हासिल विफलता के बाद आती है (जिसका उद्देश्य महज खुद को प्रकट कर के खो देना है), फलस्वरूप मुक्तिबोध के ही लेखे ‘‘साहित्यिक फ्रॉड’’ का अनुपात उनकी कविताओं में उनकी कहानियों के बनिस्बत कहीं ज्यादा है।
COLUMN
View All
विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण
भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।
Review
View All
देखने के तरीके: जॉन बर्जर की प्रसिद्ध किताब को पढ़ते हुए
पुस्तक हमें चित्रकला के संदर्भ में बताती है कि विशेषाधिकार संपन्न एक अल्पसंख्यक तबक़ा (एलीट क्लास) अतीत की कला के रहस्यीकरण का इस्तेमाल अंततः वर्तमान में प्रभुत्वशाली वर्ग की भूमिका को न्यायोचित सिद्ध करने के लिए करता है।
Blog
View All
आज के तकनीकी युग में भी किताबों का महत्त्व कम क्यों नहीं हुआ है…
जब व्यक्ति पढ़ता है, तो वह यह सीखता है कि किसी भी बात को आँख मूँदकर स्वीकार करना आवश्यक नहीं है। यही पढ़ने की आदत धीरे-धीरे तर्कवादी दृष्टि को जन्म देती है, जहाँ “क्यों” और “कैसे” जैसे प्रश्न केंद्रीय हो जाते हैं।















