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महामारी में चुनाव आयोग की सवालिया भूमिका और टी. एन. सेशन की याद

मान लेते हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए तो महज चुनाव आयोग ही काफी है. और जब देश में सभी परीक्षाएं स्थगित हैं, योजनाएं स्थगित हैं, तो फिर चुनाव स्थगित करने में किसी का क्या बिगड़ रहा है?

Voices

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मानवीय आधार पर इस्तीफा दें हरियाणा के CM और DCM: संयुक्त किसान मोर्चा

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि मानवता के आधार पर किसानों को धरना उठा लेना चाहिए, वहीं उपमुख्यमंत्री दुष्यन्त चौटाला ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।

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मौत के ‘तांडव’ के बीच शासकों का निर्मम चुनावी स्नान?

कोरोना महामारी का प्रकोप शुरू होने के साल भर बाद भी देश उसी जगह और बदतर हालत में खड़ा कर दिया गया है जहां से आगे बढ़ते हुए महाभारत जैसे इस युद्ध पर तीन सप्ताह में ही जीत हासिल कर लेने का दम्भ भरा गया था।

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भारत, पूंजीवाद, राष्ट्रवाद, साहित्य और राजनीति पर अरुंधति रॉय से सात सवाल

किसी नदी को आप विषमुक्‍त कैसे करते हैं? मेरे खयाल से, विष खुद-ब-खुद उसमें से निकल जाता है। बस, बहती हुई धारा अपने आप ऐसा कर देती है। हमें उस धारा का हिस्सा बने रहना होगा।

COLUMN

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दक्षिणावर्त: दूसरी लहर में किसके पास इतना नैतिक बल बचा है जो किसी को कुछ कहे?

चार महीनों में क्यों नहीं पत्रकारों ने बिहार के आइसोलेशन-सेंटर्स की फॉलोअप स्टोरी की? एकाध इंडियन एक्सप्रेस ने की, फिर सब खत्म! उस अवधि में दवाओं, अस्पतालों की तैयारी पर फॉलोअप स्टोरी क्यों नहीं हुई?

Review

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दक्षिणावर्त: दो घूंट पी और मस्जिद को हिलता देख…

टीवी सीरीज में या पूरे समाज में जो हो रहा है, वह एक-दूसरे का पूरक है या प्रतिबिंब? यदि प्रतिबिंब है तो जो बेचैनी, जो क्रांति न्यूज-चैनल्स को देख कर महसूस होती है, वह मोटे तौर पर समाज में अनुपस्थित क्यों है, जो समस्याएं या टकराव बहुमत वाले समाज में हैं, वह टीवी या सिनेमा से अनुपस्थित क्यों है?

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जिनवर: गृह युद्ध से जूझते सीरिया में खिलता स्त्रीवादी युटोपिया का एक फूल

सुनने में ये जगह एक फेमिनिस्ट यूटोपिया की तरह लगती है लेकिन पितृसत्ता की धुरी के सहारे चलने वाली इस दुनिया में ऐसी एक जगह है जहाँ एक गाँव उसी सपने को लेकर जी रहा है जिसके ख़्वाब दुनिया भर की ना जाने कितनी औरतों की आँखों में हैं।