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SIR, सामाजिक न्याय और भारतीय गणतंत्र का भविष्य: चुनौतियों का विश्लेषण
जो समूह आज देश में प्रभावी है, उसका मुख्य उद्देश्य जनता को अलग-थलग करना और सभी संभावित धन (खनिज धन, भूमि पूंजी और अवसर) पर कब्जा करना है, जो भारत के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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फ़लस्तीन के साथ खड़ा होना इंसानियत का तकाज़ा: फ़लस्तीन यात्रा से लौटे विनीत तिवारी
फ़लिस्तीनियों को मानव अधिकारों से वंचित रखकर दुनिया भर से मौकापरस्त यहूदियों और अन्य धर्मों के लोगों को फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसाया गया है। इज़रायल में अमेरिकी समर्थन से ये लोग ऐश का जीवन जी रहे हैं। शेष आबादी, फ़लस्तीन के मूल निवासी, ईसाई और मुसलमान दोनों ही प्रताड़ित और अपमानित जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं।
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नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!
इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.
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छह दशक से कविता के ‘अंधेरे में’ भटकता मुक्तिबोध का कहानीकार
मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया में कविता चूंकि कहानी लिख पाने में हासिल विफलता के बाद आती है (जिसका उद्देश्य महज खुद को प्रकट कर के खो देना है), फलस्वरूप मुक्तिबोध के ही लेखे ‘‘साहित्यिक फ्रॉड’’ का अनुपात उनकी कविताओं में उनकी कहानियों के बनिस्बत कहीं ज्यादा है।
COLUMN
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विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण
भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।
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दिल्ली : ख़्वाजा अहमद अब्बास के एक ख़त के बहाने, जवाहर भवन में गूंजे आज़ादी के तराने
उल्लेखनीय है कि इप्टा की इंदौर इकाई की प्रस्तुति इसके पहले 1950 के दशक में दिल्ली में हुई थी जिसमें तब के युवा इप्टा कलाकार नरहरि पटेल, प्रोफ़ेसर मिश्रराज आदि शामिल हुए थे। इस बार नाटक का आकल्पन जया मेहता ने किया और इसकी पटकथा प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव, कवि, पत्रकार और रंगकर्मी विनीत तिवारी लिखी। सुप्रसिद्ध अभिनेत्री और निर्देशक फ्लोरा बोस के कुशल के निर्देशन में इंदौर इप्टा के रंगकर्मियों ने अपने सहज सजीव अभिनय से इस नाटक को यादगार बना दिया।
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काश! कुत्तों के पास भी अपना वकील होता…
जब कुत्ते अपने पहले अपराध की सज़ा काटकर लौटेंगे तो इस चिप से उनकी ट्रैकिंग होगी कि कहीं ऐसी वैसी हरकत तो नहीं कर रहे। और फिर से किसी को काट तो नहीं रहे। और अगर कुत्तों ने दूसरी बार किसी को काटा तो उनको होगी सीधे उम्रकैद की सज़ा।















