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सतत विकास के लिए आयु-अनुकूल व्यापक यौनिक शिक्षा क्यों है ज़रूरी?

इस शिक्षा को आप कोई भी नाम दे सकते हैं- ‘लाइफ स्किल्स एजुकेशन’ या ‘हेल्थ एजुकेशन‘, या ‘कम्प्रेहेन्सिव सेक्सुएल्टी एजुकेशन (सीएसई – व्यापक यौनिक शिक्षा). महत्वपूर्ण बात यह है कि इस शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है: युवा वर्ग को अपनी व्यक्तिगत गरिमा तथा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए समुचित जानकारी उपलब्ध कराना तथा एक सकारात्मक सोच विकसित करके जेंडर समानता की ओर अग्रसर होना।

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बैतूल की घटना के बारे में मानवाधिकार आयोग को भेजा गया पत्र

प्रति, माननीय अध्यक्ष,मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग,भोपाल महोदय, आयोग द्वारा दिनांक 22 मई 2020 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। प्रेस विज्ञप्ति में यह सूचित किया गया था कि आयोग ने बैतूल में वकील …

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भारत-चीन सीमा विवाद पर गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी पंडित सुन्दरलाल का यशस्वी लेख

पं. सुन्दरलाल महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी हैं तथा गांधीवादी के रूप में विख्यात हैं। ब्रिटिश शासन के जमाने में उन्होंने हलचल मचा देने वाली एक किताब लिखी थी ‘भारत में अंग्रेजीराज’, जिसे ब्रिटिश सरकार ने तुरंत जब्त कर लिया था। 1951 ई. में वे चीन जाने वाले भारतीय शिष्टमंडल के नेता थे। वहां से लौटकर उन्होंने चीन के संबंध में ‘आज का चीन’ प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।

Lounge

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शहर से दूर जाते हुए शहर के भीतर आना… जैसे खुद को पाना! वकील लेन से जंतर-मंतर की सुरंग में…

सुरंग पार करके जब आप बाहर निकलते हैं तो खुद को एक कम्पाउंड में पाते हैं, जहां बड़े-बड़े पेड़ों और बहुत सी वनस्पति के झुरमुट के बीच चंद रिहाइशी मकान बने हैं. वहां दाखिल होते ही एक पल को आपको लगता है मानो सुंदरबन सरीखे वर्षावन के बीच बसा कोई गाँव हो. अपने आस-पास का नज़ारा देख कर जब आप विस्मय में धीरे-धीरे अपनी पलकें झपका रहे होते हैं तो खुद को जैसे किसी जलडमरूमध्य में पाते हैं.

COLUMN

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तन मन जन: कोविड-19 से भी बड़ी महामारी का रूप ले सकता है तनाव

कोरोना वायरस का जब कहर कम होने लगे तो हम सभी संवेदनशील चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों एवं समाजकर्मियों को लोगों के तनाव व अन्य मनोव्याधियों के उपचार में लगना चाहिए। उपचार यानि दवा ही नहीं, उनके तनाव के कारणों को दूर करना। यह चिकित्सकीय कम, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विशुद्ध राजनीतिक मामला है।

Review

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लगातार चलती ‘गरम हवा’ और नब्बे साल के एम. एस. सथ्यू: एक पुनरावलोकन

कलात्मक दृष्टि और सामाजिक अंतर्दृष्टि के साथ गरम हवा ने न केवल कामगार वर्ग की कई प्रमुख वास्तविकताओं की पहचान की, बल्कि यह भी सुझाया कि इन वास्तविकताओं से उत्पन्न समस्याओं का सम्मान और साहस के साथ कैसे सामना किया जा सकता है।

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इतनी हवा बनाने के बाद भी वे डरे रहते थे कि किसी दिन उलटी हवा न चल पड़े…

राजेन्द्र राजन जनसत्ता दैनिक से अब अवकाश प्राप्त हैं. किशन पटनायक की समाजवादी धारासे आते हैं और बनारस की पैदाइश हैं. भागमभाग और काटमकाट वाली इस दुनिया में राजेन्द्र राजन का व्यक्तित्व और कविता दोनों ही कबीराना ठहराव और दृष्टि के साथ चुपचाप उपस्थित होते हैं और जो कहना है, कह जाते हैं.