Open Space
View All
दो बरस बाद बेतलहेम में क्रिसमस : नया साल, नये सपने, उम्मीद और हौसले के नाम!
व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए शायद यह पहला नया बरस है और पहली क्रिसमस है जब मैं बहुत खुश हूँ। इसकी वजह है फ़लस्तीन से आया एक ईमेल जिसमें बेतेलहेम की एक दोस्त ने एक वीडियो भेजा है और साथ ही बताया है कि दो साल से ग़ज़ा में हो रहे नरसंहार के चलते बेतेलहेम में और सारे फ़लस्तीन में क्रिसमस नहीं मनाया गया था। इस बार बेतेलहेम में क्रिसमस ट्री सजाई गई और क्रिसमस मनायी गई।
Voices
View All
चंडीगढ़ : सरकारी नीतियों के खिलाफ सिलसिलेवार आंदोलनों का KMM का ऐलान
किसान मज़दूर मोर्चा पंजाब के सभी लोगों से अपील करता है कि वे आने वाले आंदोलनों में शामिल हों, क्योंकि इस कॉरपोरेट हमले का मुकाबला केवल संयुक्त संघर्ष से ही किया जा सकता है।
Editor’s Choice
View All
नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!
इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.
Lounge
View All
छह दशक से कविता के ‘अंधेरे में’ भटकता मुक्तिबोध का कहानीकार
मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया में कविता चूंकि कहानी लिख पाने में हासिल विफलता के बाद आती है (जिसका उद्देश्य महज खुद को प्रकट कर के खो देना है), फलस्वरूप मुक्तिबोध के ही लेखे ‘‘साहित्यिक फ्रॉड’’ का अनुपात उनकी कविताओं में उनकी कहानियों के बनिस्बत कहीं ज्यादा है।
COLUMN
View All
विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण
भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।
Review
View All
पुस्तक चर्चा: बदलती भू-राजनीति में रूस-अमेरिका के बीच मध्य एशिया पुल है या खाई?
पुस्तक का परिचय देते हुए लेखक और जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अजय पटनायक ने कहा कि पुस्तक का पहला संस्करण 2016 में आया था, परंतु इस भौगोलिक क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के मद्देनजर दूसरे संस्करण को लाने की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने कहा कि ये देश प्रारंभ में राष्ट्रवादी उत्साह के कारण पश्चिमी देशों और अमेरिका की ओर आकर्षित हुए थे, जिसका इस्तेमाल रूस के विरुद्ध किया गया।
Blog
View All
काश! कुत्तों के पास भी अपना वकील होता…
जब कुत्ते अपने पहले अपराध की सज़ा काटकर लौटेंगे तो इस चिप से उनकी ट्रैकिंग होगी कि कहीं ऐसी वैसी हरकत तो नहीं कर रहे। और फिर से किसी को काट तो नहीं रहे। और अगर कुत्तों ने दूसरी बार किसी को काटा तो उनको होगी सीधे उम्रकैद की सज़ा।














