महिला दिवस: इलाहाबाद से स्त्री-मुक्ति के चार सक्रिय स्वर

एक एक्टिविस्ट के रूप में मुझे इस बात की खुशी है कि इलाहाबाद में- जो जनवादी कार्यकर्ताओं का मुख्य केन्द्र है- वहां पर ऐसी कई महिला एक्टिविस्ट हैं जिन्होंने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अपना एक अलग मुकाम बनाया है। उनके लिए शिक्षा केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का जरिया न रहकर ज्ञान प्राप्ति और समाज परिवर्तन का भी माध्यम बना।

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महिला दिवस: नवउदारवादी व्यवस्था में स्त्री की आर्थिक मुक्ति का उलझा सवाल

एक भ्रम यह भी फैलाया जाता है कि नवउदारवादी अर्थव्यवस्था महिलाओं की आर्थिक मुक्ति का कारण बनेगी जबकि सच्चाई यह है कि इसके कारण संगठित क्षेत्र सिकुड़ा है और असंगठित क्षेत्र की शोषणमूलक प्रवृत्तियां खुलकर अपनाई जा रही हैं। ठेका पद्धति और संविदा नियुक्ति की परिपाटी बढ़ी है और महिलाएं इनका आसान शिकार बनी हैं क्योंकि निरीह, असंगठित महिलाओं से कम वेतन पर मनमाना काम लिया जा सकता है और जब चाहे इन्हें नौकरी से हटाया जा सकता है।

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