लालू यादव से मोहब्बत के लिए चाहिए वो नजर जिसमें सामाजिक न्याय की आस हो!

वे ऐसी शख्सियत हैं जिसने करोड़ों लोगों की जिंदगी को कई तरह से प्रभावित किया है- सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से। बहुसंख्य अल्पसंख्यकों, पिछड़ों व दलितों में उनकी छवि मसीहा की है तो सवर्णों, थिंक टैंक, मीडिया, इंटेलीजेंसिया में वह आंबेडकर के बाद भारतीय समाज के सबसे बड़े खलनायक हैं। आज उसी लालू यादव की 74वीं वर्षगांठ है।

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बिहार चुनाव और राम मंदिर के भूमि पूजन से ठीक पहले आ रही है लालू प्रसाद यादव के भाषणों की किताब

इन भाषणों में लालू प्रसाद बिहार विधान सभा के नेता विपक्ष के रूप में उभरते संसदीय जनप्रतिनिधि से लेकर मुख्यमंत्री और रेलमंत्री के रूप में सीजंड जनप्रतिनिधि की तरह दीखते हैं.

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