आदर्शों का लोप: राष्‍ट्रीय आंदोलन के दौरान भारत के भविष्‍य की परिकल्‍पना: संदर्भ नेहरू और गांधी

एक औद्योगीकृत देश के रूप में भारत के संवैधानिक उभार व विकास की अंग्रणी राष्‍ट्रवादियों द्वारा सराहना को गांधीजी पूर्णत: खारिज करते थे। उनका उद्घोष था कि ”बिना अंग्रेज़ों के अंग्रेज़ी शासन” की कोई जगह ही नहीं थी।

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हमारे सपनों से नेहरू को गायब करने में कांग्रेस भी कम दोषी नहीं है…

आज जब हम कोविड-19 जैसी परिस्थिति से गुजर रहे है तो नेहरू की वैज्ञानिक सोच एक बार फिर चर्चा में है

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