बात बोलेगी: झूठ की कोई इंतिहा नहीं…

भारत के संसदीय इतिहास में यह पहला संसदीय सत्र है जहां प्रश्नकाल नहीं है। यानी मौखिक रूप से कोई प्रश्न और बहस नहीं होगी। आप चाहें तो लिखित में दिये गये जवाबों से सच और झूठ का विच्छेदन करते रहिए, पर उससे कुछ हासिल नहीं होगा।

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बात बोलेगी: महापलायन की ‘चांदसी’ तक़रीरों के बीच फिर से खाली होते गाँव

लॉकडाउन की लंबी अवधि को पार करते हुए, अनलॉक की भी एक लंबी अवधि पूरी करने के बाद, आज सच्चाई ये है कि गाँव लौटे 100 में से 95 लोग शहरों और महानगरों की ओर लौट चुके हैं। उन्हें कोई मलाल नहीं है कि शहरों और महानगरों ने कैसी बेरुखी दिखलायी।

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गांव और शहर के बीच झूलती जिंदगी में देखिए बेनकाब वर्ग विभाजन का अक्स

लॉकडाउन के दौरान शहरों में रोजगार पूरी तरह से ठप हो जाने के बाद मजदूरों को अपना गांव दिखायी पड़ा था जहां से वे शहर की तरफ पलायन करके आये थे ताकि वे अपने और अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम कर सकें. अब, जब हम लॉकडाउन से अनलॉक की तरफ बढ़ रहे हैं तो एक बार फिर वे रोजगार की तलाश में उसी शहर की तरफ निकलने लगे हैं.

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भारत में किसान और मजदूर के व्यावहारिक रिश्ते को सही तरीके से समझे जाने की ज़रूरत है

आज देश के कोने-कोने से मजदूर, कामगार, मेहनतकश और तमाम तरह से रोजी-रोटी के इंतजाम में शहरों में आए लोगों का कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थितियां पैदा होने पर गाँव भाग कर जानें के लिए मजबूर होना यह दर्शाता है कि इनका संबंध अभी भी निश्चित रूप से खेती-किसानी और किसान से है और इसलिए अब जरूरी हो जाता है कि उस रिश्ते को सही तरीके से समझा जाए।

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वर्ण व्यवस्था के आईने में लॉकडाउन और श्रमिक विभाजन का ऐतिहासिक सच

आज विश्व संकट के दौर से गुजर रहा है। इस संकट से उबरने के लिए विभिन्न देशों ने मजबूत कदम उठाया है, अपने लोगों को विश्वास में लेकर ये देश …

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प्रवासी मेहनकशों का लॉकडाउन में हुआ उत्पीड़न और भुला दिए गए कुछ नैतिक सवाल

बारह साल की जमलो मकदम के परिवार को हम क्या समझा सकते हैं? क्या विवरण और स्पष्टीकरण दे सकते हैं उसके अंत का? जमलो, एक आदिवासी बालिका, तेलंगाना में मिर्चों …

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लॉकडाउन में बच्चा गंवाकर दिल्ली से घर लौटे अंगद की मौत में छुपा है प्रवासी त्रासदी का अगला अध्याय

गाज़ियाबाद से आजमगढ़ लौटे दलित युवक अंगद की पिछले 6 जून को हुई मौत प्रवासी श्रमिकों की त्रासदी का एक नया अध्याय खोल रही है। ये कहानी आने वाले दिनों …

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झारखंड: PESA कानून के तहत स्वशासन की आदिवासी परंपरा को पुनर्जीवित करने का मौका

प्रवासी मजदूरों के लिए जो कोई और सरकार न कर पाई वह मौजूदा झारखंड सरकार ने किया है वीर भारत तलवार (प्रभात खबर, 10-जून-2020) यह एक प्रतिष्ठित विचारक द्वारा झारखंड …

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गुजरातः प्रवासी श्रमिक आयोग की स्थापना व श्रम क़ानून में संशोधन वापसी के लिए CM को पत्र

माइनॉरिटी कोआर्डिनेशन कमेटी ने आज गुजरात मे मुख्यमंत्री को राज्य में प्रवासी श्रमिक आयोग की स्थापना व श्रम क़ानून में संशोधन वापस लेने के लिए पत्र लिखा है, जो निम्न है। …

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बनारस पहुंची श्रमिक ट्रेन में मृत आज़मगढ़ के प्रवासी के परिजनों के दावे से सवालों के घेरे में रेलवे

यह उद्घाटन रिहाई मंच ने गोंड़ के परिजनों से की मुलाकात के बाद किया है और पोस्टमार्टम में देरी पर सवाल उठाया है

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