जलवायु जोखिम सूचकांक के शीर्ष दस देशों में भारत शामिल, जर्मनवाच की रिपोर्ट

भारत के ऊपर हैं ज़िम्बाब्वे, जापान और मलावी जैसे देश। शीर्ष के पांच देशों में तीन अफ्रीका से हैं।

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जलवायु परिवर्तन की शामत लाएगी वाइट हाउस में बिडेन की आमद

तय है कि बिडेन न सिर्फ अमेरिका को पेरिस समझौते में फिर से शामिल कराने के अपने वादे को पूरा करेंगे, बल्कि यह भी साफ़ दिख रहा है कि पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का नेतृत्व भी वो करने से चूकेंगे नहीं।

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इस साल बदलेगी पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक कोशिशों की दशा और दिशा

दरअसल वन प्लैनेट समिट में हाई अम्बिशन को अलिशन फॉर नेचर एंड पीपल नाम के 50 देशों के एक गुट ने पृथ्वी की सतह के एक तिहाई हिस्से को संरक्षित करने की प्रतिज्ञा है। लेकिन विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 30 प्रतिशत नहीं, ज़रूरत 50 फीसद के संरक्षण की है।

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‘वर्ष 2020’ मानव इतिहास का सबसे गर्म साल रहा!

यूरोपीय संघ के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम (अर्थ ऑब्ज़र्वेशन प्रोग्राम), कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने घोषणा कर दी है कि ला-नीना, एक आवर्ती मौसम की घटना जिसका वैश्विक तापमान पर ठंडा प्रभाव पड़ता है, के बावजूद 2020 के दौरान असामान्य उच्च तापमान रहे और पिछले रिकॉर्ड-धारक 2016 के साथ अब 2020 भी सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है।

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गरीब देशों के लिए सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ है 2020 में आया जलवायु परिवर्तन: रिपोर्ट

2020 में मौसम की कुछ मुख्य घटनाएं गरीब देशों में विनाशकारी थीं, भले ही मूल्य टैग कम था। उदाहरण के लिए, दक्षिण सूडान ने सबसे खराब बाढ़ में से एक का अनुभव किया, जिसने 138 लोगों को मार डाला और वर्ष की फसलों को नष्ट कर दिया।

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पूरी दुनिया को लॉकडाउन करने के बावजूद रिकॉर्ड स्तर पर कायम है ग्रीनहाउस उत्सर्जन: WMO

लॉकडाउन ने कार्बन डाइऑक्साइड जैसे कई प्रदूषकों के उत्सर्जन में तो कटौती की, लेकिन CO2 सांद्रता पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। डब्लूएमओ ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के अनुसार, कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में 2019 में तो वृद्धि बनी ही रही, वो वृद्धि 2020 में भी जारी है।

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COVID-19 से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जलवायु को खतरे में डाल रहे हैं G-20 के देश

कोविड से पहले जहाँ दुनिया भर में पर्यावरण अनुकूल नीतिगत फैसलों के नतीजे दिखना शुरू ही हुए थे, वहीँ कोविड की आर्थिक मार से उबरने के नाम पर दुनिया की कुछ चुनिन्दा अर्थव्‍यवस्‍थाएं अब जीवाश्‍म ईंधन से जुड़े उद्योगों पर अच्छा ख़ासा निवेश कर रही हैं। इससे न सिर्फ़ पिछले फैसलों के नतीजों पर पानी फिर रहा है, बल्कि अगले दस सालों में रिन्यूएबिल ऊर्जा अपनाने के रास्ते पर ख़ासी रुकावटें भी पैदा होंगी।

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आर्कटिक में बर्फ न्‍यूनतम स्‍तर पर, अब तक का सबसे गर्म महीना रहा सितम्‍बर

पूरे यूरोप में भी सितंबर में औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह इससे पहले सबसे गर्म सितंबर के तौर पर दर्ज किए गए वर्ष 2018 के इसी महीने के मुकाबले 0.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रहा।

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COVID-19 से लड़ने के लिए शून्य उत्सर्जन की सूची में दिल्ली समेत भारत के तीन शहर शामिल: UN

संयुक्त राष्ट्र के रेस टू जीरो अभियान की तर्ज़ पर यह शहर और उद्योग 2050 तक शून्य-कार्बन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने की दौड़ में हैं। रेस टू जीरो अभियान, 2040-50 के दशक में शून्य उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध स्थानीय सरकारों, व्यवसायों, निवेशकों और अन्य लोगों का सबसे बड़ा गठबंधन है।

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तन मन जन: COVID-19 के बीच ग्‍लोबल वार्मिंग के खिलाफ़ अपनी इम्‍यूनिटी बढ़ा रहे हैं वायरस

स्विस वैज्ञानिकों के इस अध्ययन के अनुसार पानी में पनपने वाले वायरस जो बढ़ते तापमान में रहने योग्य बन जाते हैं, वे लम्बे समय तक रोगों को फैला सकते हैं। इन पर क्लोरीन जैसे कीटाणुनाशकों का भी असर नहीं होता।

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