IPCC की रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए दस दिन की बैठक तय करेगी जलवायु परिवर्तन का भविष्य

ध्यान रहे कि 1.5 ℃ के लक्ष्य तय करने वाली IPCC की 2018 की रिपोर्ट ने जलवायु पर सार्वजनिक विमर्श को स्थायी रूप से बदल दिया और जिसके बाद से सरकारें और उद्योग पहले से कहीं अधिक जांच के दायरे में आ गए हैं।

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प्रदूषक कम्पनियों के खिलाफ जलवायु मुकदमे करना हुआ आसान, गुणारोपण विज्ञान पर नया शोध

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से कानूनी कार्रवाई का विषय बन रहा है। अब तक दुनिया भर में जलवायु संबंधी 1500 मुक़दमे दायर हुए हैं, जिसमें पिछले महीने का एक मामला भी शामिल है जहां एक डच अदालत ने शेल कंपनी को अपने उत्सर्जन में कटौती करने का आदेश दिया था।

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जलवायु, कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकट से निपटने में G7 देशों की तैयारी नाकाफ़ी

यदि ये नेतागण अक्टूबर में होने वाली G20 बैठक तक एकजुट नहीं होते हैं, तो COP26 बैठक का विफल होना तय है। फ़िलहाल सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा अब COP26 से पहले G7 नेताओं के लिए महत्वपूर्ण तारीख के रूप में निर्धारित की गयी है।

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जलवायु परिवर्तन की कोई वैक्सीन नहीं है! भारत के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक गाइड

इस दस्तावेज का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को जलवायु परिवर्तन और मरीजों तथा समुदायों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उसके असर के बारे में विभिन्न विचार-विमर्श करने और मीडिया, विधायिका तथा नीति निर्धारकों जैसे हितधारकों को प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना और संचार संबंधी विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करना है।

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G7 देशों की जलवायु वित्त प्रतिज्ञाओं के मामले में वादाखिलाफ़ी बदस्तूर जारी

CARE संस्था ने पेरिस समझौते के तहत विकसित देशों द्वारा पेश की गयी नवीनतम आधिकारिक वित्त योजनाओं का विश्लेषण किया है और पाया है कि G7 और अन्य धनी देशों के कमज़ोर देशों के लिए समर्थन के ज़बानी वादों के बावजूद, सभी 24 मूल्यांकन किये गये डोनर्स द्वारा प्रस्तुत की गयी वास्तविक जानकारी मांगी गयी से बहुत कम है और कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि अमीर देश अपनी जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे।

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2020 से भी गरम होंगे आने वाले साल, ‘रेस टु ज़ीरो’ में शामिल हुए दुनिया भर के स्वास्थ्य संस्थान

इस बात का पता चला है वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्लूएमओ) और UKMET यूके (यूनाइटेड किंगडम) मेट (मौसम) कार्यालय की सालाना जारी होने वाली ताज़ा ग्लोबल क्लाइमेट अपडेट नाम की रिपोर्ट में, जो अगले पांच वर्षों के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों की भविष्यवाणी करती है।

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जलवायु परिवर्तन: रॉयल डच शेल के खिलाफ हेग की अदालत का ऐतिहासिक फैसला

यह अपनी तरह का पहला कानूनी निर्णय है जो वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप एक प्रदूषणकारी अंतरराष्ट्रीय कम्पनी को अपने उत्सर्जन को कम करने के लिए आदेश देता है।

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प्रदूषण-मुक्त स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए वैश्विक रोड मैप जारी

हेल्थ केयर विदआउट हार्म पूरी दुनिया में मरीजों की सुरक्षा या देखभाल से समझौता किये बगैर स्वास्थ्य क्षेत्र के रूपांतरण को संभव बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि वह पारिस्थितिकीय रूप से सतत बनने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वास्थ्य एवं न्याय का अग्रणी पैरोकार बन सके।

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कार्बन-सघन वस्तुओं के आयात को दंडित करेगा यूरोपीय संघ

जहाँ एक तरफ़ यूरोपीय संघ अपनी कार्बन डील की रणनीति के अभिन्न अंग के रूप में इस कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को देखता है, क्योंकि इसकी मदद से वो पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों के तहत 2050 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करना चाहता है, वहीँ एक नज़रिया यह भी है कि यह नियम एक तरह का संरक्षणवाद है जिससे व्यापार के लिए सभी को बराबर मौका नहीं मिलेगा।

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बिजली की मांग और कोयला बिजली उत्पादन में भी पिछले साल चीन रहा अव्वल

इस वार्षिक रिपोर्ट में 2020 में दुनिया भर में हो रहे स्वच्छ बिजली परिवर्तन के मद्देनजर दुनिया के हर देश के बिजली के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है ताकि पहला सही और विशुद्ध विवरण किया जा सके। यह 2000 से देश का ईंधन डेटा साल दर साल एकत्र करता आया है। दुनिया की 90% बिजली उत्पादन करने वाले 68 देशों का साल 2020 का पूरा डाटा और उसी के हिसाब से दुनिया भर में बदलाव के लिए एक अनुमान को आधार बनाया गया है।

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