ग्लासगो क्लाइमेट समिट से पहले UNGA पर निगाह, जलवायु परिवर्तन पर सार्थक संवाद अपेक्षित

आज ग्लासगो क्लाइमेट समिट से बमुश्किल 50 दिन पहले संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली (यूएनजीए) का 76वां सत्र शुरू हुआ है। इस बैठक से तमाम उम्मीदें हैं, खास तौर से इसलिए क्योंकि इसमें होने वाली चर्चाएं और निर्णय वैश्विक जलवायु नीतियों की दशा और दिशा को बदल सकते हैं।

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पेरिस समझौते के बाद IMF ने एक-तिहाई देशों को ऊर्जा पर सब्सिडी खत्म करने को कहा था: रिपोर्ट

आइएमएफ सर्विलांस एंड क्लाइमेट चेंज ट्रांज़िशन रिस्क्स शीर्षक की यह रिपोर्ट दिसंबर 2015 में पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर और इस साल मार्च के बीच आइएमएफ के 190 सदस्य देशों में आयोजित सभी 595 अनुच्छेद IV रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित है। अनुच्छेद IV रिपोर्टों में उन देशों के लिए नीतिगत सलाह शामिल है जो आने वाले वर्षों के लिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं को आकार देती हैं।

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जलवायु संकट की आग को भड़का रहे हैं RBI समेत कई केंद्रीय बैंक: रिपोर्ट

अनेक केंद्रीय बैंकों ने सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा है कि वे प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के लिए सबसे सशक्त वित्तीय संस्थानों को प्रेरित करेंगे, मगर इस रिपोर्ट से जाहिर होता है कि उनमें से एक भी बैंक पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के आसपास भी नहीं नजर आता। केंद्रीय बैंकों के पास जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने के लिए उत्प्रेरक के तौर पर काम करने की अकूत शक्तियां होती हैं लेकिन वे इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

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इंसानियत के लिए खतरे का लाल निशान है आज जारी UN की जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट

इस रिपोर्ट को आइपीसीसी में शामिल 195 सदस्य देशों की सरकारों ने पिछली 26 जुलाई को शुरू हुए दो हफ्तों के वर्चुअल अप्रूवल सेशन के दौरान शुक्रवार को मंजूरी दी है। वर्किंग ग्रुप 1 की रिपोर्ट आइपीसीसी की छठी असेसमेंट रिपोर्ट (एआर6) की पहली किस्त है।

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IPCC की रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए दस दिन की बैठक तय करेगी जलवायु परिवर्तन का भविष्य

ध्यान रहे कि 1.5 ℃ के लक्ष्य तय करने वाली IPCC की 2018 की रिपोर्ट ने जलवायु पर सार्वजनिक विमर्श को स्थायी रूप से बदल दिया और जिसके बाद से सरकारें और उद्योग पहले से कहीं अधिक जांच के दायरे में आ गए हैं।

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प्रदूषक कम्पनियों के खिलाफ जलवायु मुकदमे करना हुआ आसान, गुणारोपण विज्ञान पर नया शोध

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से कानूनी कार्रवाई का विषय बन रहा है। अब तक दुनिया भर में जलवायु संबंधी 1500 मुक़दमे दायर हुए हैं, जिसमें पिछले महीने का एक मामला भी शामिल है जहां एक डच अदालत ने शेल कंपनी को अपने उत्सर्जन में कटौती करने का आदेश दिया था।

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जलवायु, कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकट से निपटने में G7 देशों की तैयारी नाकाफ़ी

यदि ये नेतागण अक्टूबर में होने वाली G20 बैठक तक एकजुट नहीं होते हैं, तो COP26 बैठक का विफल होना तय है। फ़िलहाल सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा अब COP26 से पहले G7 नेताओं के लिए महत्वपूर्ण तारीख के रूप में निर्धारित की गयी है।

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जलवायु परिवर्तन की कोई वैक्सीन नहीं है! भारत के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक गाइड

इस दस्तावेज का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को जलवायु परिवर्तन और मरीजों तथा समुदायों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उसके असर के बारे में विभिन्न विचार-विमर्श करने और मीडिया, विधायिका तथा नीति निर्धारकों जैसे हितधारकों को प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना और संचार संबंधी विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करना है।

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G7 देशों की जलवायु वित्त प्रतिज्ञाओं के मामले में वादाखिलाफ़ी बदस्तूर जारी

CARE संस्था ने पेरिस समझौते के तहत विकसित देशों द्वारा पेश की गयी नवीनतम आधिकारिक वित्त योजनाओं का विश्लेषण किया है और पाया है कि G7 और अन्य धनी देशों के कमज़ोर देशों के लिए समर्थन के ज़बानी वादों के बावजूद, सभी 24 मूल्यांकन किये गये डोनर्स द्वारा प्रस्तुत की गयी वास्तविक जानकारी मांगी गयी से बहुत कम है और कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि अमीर देश अपनी जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे।

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2020 से भी गरम होंगे आने वाले साल, ‘रेस टु ज़ीरो’ में शामिल हुए दुनिया भर के स्वास्थ्य संस्थान

इस बात का पता चला है वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्लूएमओ) और UKMET यूके (यूनाइटेड किंगडम) मेट (मौसम) कार्यालय की सालाना जारी होने वाली ताज़ा ग्लोबल क्लाइमेट अपडेट नाम की रिपोर्ट में, जो अगले पांच वर्षों के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों की भविष्यवाणी करती है।

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