पंचतत्व: बोल मेरी बिजली कितना पानी

विदर्भ में ताप बिजलीघरों को पानी देने पर एक रिपोर्ट गैर-सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने भी दी है. संस्था के मुताबिक, 2003 से 2011 के बीच 3988.7 करोड़ क्यू. मी. पानी तापबिजली घरों की दी जा चुकी है और इससे करीबन 79,774 हे. खेतों को सींचा जा सकता था. विदर्भ में आत्महत्याओं के सिलसिले को कृषि समस्या और सिंचाई की कमी से जोड़ा जाता रहा है. खासकर जिन जिलों में किसान आत्महत्याएं अधिक संजीदा रुख अख्तियार किए हुए है वहां कोयला आधारित ताप बिजलीघरों को मंजूरी देना अतार्किक सा लगता है.

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छत्तीसगढ़: कोयला मजदूरों की हड़ताल के समर्थन में कल किसान-आदिवासी संगठन भी उतरेंगे मैदान में

आज यहां जारी एक बयान में इन किसान संगठनों से जुड़े नेताओं संजय पराते, आलोक शुक्ला, सुदेश टीकम, आई के वर्मा, राजिम केतवास, पारसनाथ साहू, तेजेन्द्र विद्रोही, नरोत्तम शर्मा, बाल सिंह आदि ने कहा कि विकास के नाम पर विभिन्न परियोजनाओं की आड़ में अभी तक दो करोड़ से ज्यादा आदिवासियों और गरीब किसानों को उनकी भूमि से विस्थापित किया गया है।

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कोयले के व्यवसायिक खनन सम्बन्धी केंद्र के फ़ैसले के खिलाफ़ झारखण्ड जनाधिकार महासभा का आह्वान

महासभा कोयला की कमर्शियल खनन की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान करती है

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