बरसों तक भीख मांग कर खाने वाला एक फ़कीर हंगर इंडेक्स को कैसे स्वीकार करे!

ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार 27.2 स्कोर के साथ भारत में भूख के मामले में स्थिति ‘गंभीर’ है. रिपोर्ट के अनुसार भारत की करीब 14 फीसदी जनसंख्या कुपोषण का शिकार है.

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भूखे पेट, खाली खाता, सूनी थाली! मिड डे मील का राशन और पैसा बन गया ‘आपदा में अवसर’

सरकार का दावा है कि उसने तो बहुत पहले ही पके हुए मध्याह्न भोजन या फिर उसके बदले की राशि बच्चों के खाते में डाल दी है, पर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

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मौत के कगार पर हैं दिव्‍यांग व्‍यवस्‍था की सवा दो करोड़ सौतेली संतानें

सरकार ने अरबों के पैकेज की घोषणा की, राशन मुहैया करवाने का वादा किया, रोजगार का भरोसा दिलाया पर जब अच्छे-भले सामान्‍य लोगों को इन सबका फायदा नहीं मिल रहा तो भला दिव्यांगों के बारे में कौन सोचता है।

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28 फीसदी कवरेज वाले ‘आत्मनिर्भर भारत’ में राशन कार्ड होना भुखमरी से बचने की गारंटी नहीं है!

मोबाइलवाणी ने जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की और इस कोशिश को नाम दिया रोजी रोटी अधिकार अभियान। अभियान के तहत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के गांवों और शहरों में गरीब तबके के परिवारों से उनका हाल जाना।

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तबाही के मुहाने पर खड़े बुनकरों के लिए मुफ्ती-ए-बनारस ने लगायी अपने सांसद मोदी से गुहार

मुफ्ती-ए-बनारस ने अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बिजली दर की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग करते हुए एक अपील जारी की है।

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बनारस में भुखमरी की पहली रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के उत्पीड़न पर NHRC का चीफ सेक्रेटरी को नोटिस

शिकायत को मानवाधिकार आयोग ने डायरी संख्या 58948/CR/2020 के तहत दर्ज किया और आज सोमवार को इससे सम्बंधित केस संख्या 10606/24/72/2020 पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के प्रमुश सचिव को कार्रवाई का नोटिस जारी कर दिया है.

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जब पीड़ित ने अपने पक्ष में खबर लिखने वाले पत्रकार पर ही करवा दी FIR! सुप्रिया शर्मा का केस

बनारस में भुखमरी के शिकार मुसहरों से जुड़े अंकरी काण्ड की धूल अभी बैठ ही रही थी कि एक और पत्रकार के ऊपर मुकदमा लाद दिया गया है. दिलचस्प है …

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COVID-19: भूख का समंदर और बदलती दुनिया के संकेत

देश की सभी सरकारों को चाहिए कि वे देश के सभी इंजन व इसके थक चुके कलपुर्जे, निजी हस्पतालों का फ़ौरन राष्ट्रीयकरण कर इस राष्ट्रीय आपदा के समय हुकूमत चुनाव प्रचार स्टाइल से बचकर टीम इण्डिया बनकर काम करें

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‘भूख से मरने पर, साबुन हमें नहीं बचा पाएंगे’!

पालघर जिले के कवटेपाड़ा में रहने वाले अधिकांश आदिवासी परिवार निर्माण स्थलों पर दैनिक मज़दूरी करके जीवनयापन करते हैं। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण यह काम बंद हो गया है, और अब उनके पैसे और राशन तेज़ी से ख़त्म होने लगे हैं

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