व्यक्ति से विरासत तक: भारत कला भवन पहली बार बना मानवाधिकार सम्मानों का संरक्षक
यह समर्पण केवल पदकों और प्रमाण-पत्रों का हस्तांतरण नहीं है। यह उन दशकों लंबे संघर्षों, जनसाक्ष्यों, पीड़ितों की आवाजों और मानवीय गरिमा के लिए किए गए प्रयासों की स्मृतियों को निजी संग्रह से निकालकर सार्वजनिक धरोहर में बदलने का महत्वपूर्ण कदम है।
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