आइडेंटिटी और विकृत माडर्निटी से उपजे संकट के तीन ताज़ा उदाहरण

एक समाज के तौर पर या उसके प्रातिनिधिक सैंपल के तौर पर लालू के परिवार से ताकतवर, धनी और सामाजिक तौर पर सशक्त परिवार से बड़ा उदाहरण क्या होगा, प्रियंका वाड्रा से सशक्त व्यक्ति कौन होगा, लेकिन ये दोनों भी जब बढ़कर चुनाव करते हैं तो हिंदुत्व को गाली देने के तमाम आयामों के बावजूद मिसेज वाड्रा फिर से उसी हिंदुत्व की शरण जाती हैं, यहां तक कि ये भी कहती हैं कि वह 17 वर्ष की अवस्था से व्रत रख रही हैं और उन्हें किसी योगी आदित्यनाथ के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। तेजस्वी यादव जब प्रेम-विवाह करते हैं तो एक उदाहरण तो पेश करते हैं युवाओं के सामने, अंतर्धार्मिक विवाह कर,लेकिन फिर ढाक के तीन पात। वह रेचल को न केवल हिंदू बनाते हैं, बल्कि यादव ही बनाते हैं।

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दक्षिणावर्त: इंसाफ की डगर पर ‘पहचान’ की पूंजी और ‘लिन्चिंग’ का खाता

अगर पुलिस का आधिकारिक बयान दिल्‍ली में सही माना जाना है तो फिर बाकी जगह भी उसका मान रखा जाना था। अगर नहीं, तो फिर दिल्‍ली में भी झगड़े वाली थ्‍योरी का कोई अर्थ नहीं है। क्‍या पुलिस की तफ़्तीश और बयान कोई सुविधा है? जिसे जब चाहे सामने रख दें और जब चाहे गलत करार दें?

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