पंचतत्व: देश में जंगल क्षेत्र बढ़ने का ‘बिकिनी’ सत्य

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट, 2019 के आंकड़े बता रहे हैं कि देश में आजादी के बाद से ही जंगलों के क्षेत्रफल में कोई कमी नहीं आई है. इसके मुताबिक, देश में वन क्षेत्र में करीब 5,188 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है और दिल्ली और गोवा को मिलाकर भूभाग इतना ही है..

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पंचतत्व: गंगाजल को गया तक ले जाना बिहार सरकार का विकट दृष्टिदोष है

खुद गंगा अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. अगर गर्मियों में उससे 50 एमसीएम पानी निकाल लिया जाएगा तो खुद इसके परितंत्र पर क्या असर पड़ेगा, इसका क्या कोई अध्ययन बिहार सरकार ने कराया है?

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पंचतत्व: देर आरे, दुरुस्त आरे

पिछली भाजपा सरकार यह मानती ही नहीं थी कि यहां, आरे में कोई वनक्षेत्र मौजूद भी है. सचाई यह है कि यहां करीब दस लाख पेड़ हैं. अब जब उद्धव ठाकरे ने यहां वनक्षेत्र को संरक्षित बनाने की घोषणा की है, तो इसे देर आयद दुरुस्त आयद निर्णय कहा जा सकता है.

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पंचतत्‍व: सुशांत पर छाती पीटने वाला समाज अपने पानी में घुले संखिया पर सोया है

पिछले पांच साल में आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों की संख्या में करीब डेढ़ सौ फीसद की बढ़ोतरी हुई, पर इस पर न तो टीवी पर डिबेट है न सोशल मीडिया पर हैशटैग

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पंचतत्‍व: सुबर्णरेखा की लड़खड़ाती जीवनरेखा

स्वर्णरेखा नदी में सोने के कण पाये जाते हैं, पर उद्योगों और घरों से निकले अपशिष्ट के साथ खदानों से निकले अयस्कों ने इस नदी के जीवन पर सवालिया निशान लगा दिया है. यह नदी सूखी तो झारखंड, बंगाल और ओडिशा में कई इलाके जलविहीन हो जाएंगे

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पंचतत्व: हिंदुओं को स्वर्ग ले जाने वाली वैतरणी नदी कहां पर है?

हिंदुओं के लिए स्वर्ग के द्वार खोलने वाली वैतरणी नदी ओडिशा में भी है और महाराष्ट्र में भी. रावी, व्यास और सतलज हांगकांग में भी हैं और कर्नाटक की अधिकांश नदियों के नाम वैदिक संस्कृत में हैं. जाहिर है, नदियों के नाम इतिहास के सूत्र छोड़ते हैं. भाषा विज्ञानियों को इस दिशा में काम करना चाहिए.

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पंचतत्व: शहरों की बवासीर है ठोस कचरा

देश के पांच राज्य ऐसे हैं, जो देश के कुल कचरा उत्पादन का आधा हिस्सा बनाते हैं पर उसे ट्रीट नहीं करते. महाराष्ट्र सबसे अधिक कचरा पैदा करता है पर उसका 40 फीसद से अधिक कचरा बगैर ट्रीटमेंट के पड़ा रहता है.

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पंचतत्व: आदिगंगा को निगल गया कोलकाता का फैलता शहर

कोलकाता में कालीघाट के पास से एक गंदा नाला बहता है. यह नाला नहीं, स्थानीय लोगों के मुताबिक असली गंगा है. आदिगंगा नाम की इस नदी को शहर ने बिसरा दिया, पर परंपराओं में यह अब भी मौजूद है

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पंचतत्व: सोन से रूठी नर्मदा मैया कहीं हमसे भी न रूठ जाए!

लगातार होते रेत खनन, नदियों के पास ताबड़तोड़ कथित विकास परियोजनाओं और बांध बनाये जाने और इसके जलागम क्षेत्र में जंगल की अबाध कटाई ने नर्मदा को बहुत बीमार बना दिया है. गर्मियों में नर्मदा का जलस्तर तो इतना गिर गया था कि कोई पांव-पैदल भी नदी को पार कर सकता था. इस नदी को नदी-जोड़ परियोजना ने भी काफी नुकसान पहुंचाया है

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