ओडिशा: खनन कंपनियों का विरोध कर रहे नेताओं की गिरफ्तारी पर सरोकारी नागरिकों का निंदा बयान

हमारा दृढ़ विश्वास है कि लद सिकाका, लिंगराज आज़ाद और हीरामल नायक जैसे नेताओं की गिरफ्तारी, या कांटामाल और तालामपदर के ग्रामीणों की घेराबंदी, अलग-अलग या एक-दूसरे से असंबद्ध घटनाएं नहीं हैं; बल्कि ओडिशा में खनन और औद्योगीकरण को हर संभव तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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Lingraj Azad

ओडिशा : लिंगराज सहित अवैध गिरफ्तारियों और दमन के खिलाफ SKM का प्रतिवाद

पुलिस ने 25 मार्च 2026 को भवानीपटना से प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता लिंगराज आज़ाद को गिरफ्तार किया और तब से उन्हें जमानत का वैध अधिकार दिए बिना जेल में बंद रखा है। लिंगराज आज़ाद संयुक्त किसान मोर्चा, एनएपीएम, नियमगिरि सुरक्षा समिति और मां माटी माली सुरक्षा मंच सहित जन आंदोलनों से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों में अवैध भूमि अधिग्रहण और खनन परियोजनाओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है। एसकेएम अवैध गिरफ्तारियों और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की कड़ी मांग करता है।

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पर्यावरण दिवस पर ओडिशा का नारा- ‘मिट्टी बेचने के लिए नहीं, पहाड़ मुनाफे के लिए नहीं’!

सिजिमाली का पूरा इलाका फरवरी के बाद से ही संघर्ष का क्षेत्र बन चुका था। आसमान में ड्रोन उड़ रहे थे, सड़कों पर पुलिस की गाड़ियां गश्‍त लगा रही थीं और गांवों में  पुलिस मार्च कर रही थी। सिजिमाली में वेदांता और कुटरुमाली में अदाणी को तीन साल पहले जब बॉक्साइट के भंडार पट्टे पर दिए गए थे, तभी से लोगों का लगातार दमन जारी है और उनके ऊपर मनगढ़ंत मुकदमे थोपे गए हैं।

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ओडिशा: पर्यावरण दिवस पर धारा 144, दमन और गिरफ्तारी, माली पर्वत के लोगों का बयान

हम बहुत गहरे दुख और शर्म साथ यह बात साझा करते हैं कि हमारी मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित और विख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता मेधा पाटकर को 5 जून 2025 ओडिशा पुलिस द्वारा रायगड़ा स्टेशन पर रोक दिया गया। एक देश के नागरिक होने के नाते, क्या हमें यह अधिकार नहीं है कि हम पर्यावरण दिवस मनाएं और उसके लिए एक प्रेरणादायी शख्सियत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करें?

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हिंदुत्व की भ्रामक अवधारणा के बरक्स भारत की विवेकवादी परंपरा

प्रकृति और मानव शरीर के सजग निरीक्षक के रूप में भारत के प्रारंभिक वैज्ञानिकों और दार्शनिकों ने मानवीय ज्ञानेन्द्रियों का अध्ययन किया, स्वप्न, स्मरण शक्ति और चेतना का विश्लेषण किया। उनमें जो सर्वश्रेष्ठ थे उन्होंने प्रकृति के द्वंद को गुणात्मक और परिमाणात्मक दोनों रूप से समझा तथा आधुनिक परमाणु सिद्धांत के एक प्रारंभिक ढांचे की भी परिकल्पना कर ली। यह तर्कवादी आधार ही था जिस पर भारतीय सभ्यता पल्लवित हुई।

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