कोडरमा: एम्‍बुलेंस नहीं पहुंचने से महिला की मौत की खबर करने वाले पत्रकार और चैनल पर मुकदमा

मामला सतगावां थाने का है जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर चंद्रमोहन कुमार ने पत्रकार प्रवीण कुमार और न्यूज चैनल ‘आरपी भारत’ के खिलाफ आइपीसी की धारा 186, 505, 34 समेत कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

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ढहते घरों की गहराती दरारों पर इश्‍तहार चिपकाती सियासत और मीडिया

19 जुलाई तक जारी हुए आंकड़ों के अनुसार असम में 79 लोगों की जान इस विनाशकारी बाढ़ ने ले ली है, राज्य के 26 जिलों के 2678 गाँव इसकी चपेट में हैंं और हजारों एकड़ की खेती वाली ज़मीनें जलमग्न हो चुकी हैंं। बिहार में भी करीब 3 लाख लोगों पर खतरा है, राज्य की सभी मुख्य नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर प्रवाहित हैं।

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कोरोना की आड़ में मीडिया को ‘पत्रकारों’ से सैनिटाइज़ करने की साज़िश है इस दौर की छंटनी!

कोरोना महामारी के चढ़ते ग्राफ़ के बीच पत्रकारों की नौकरी जिस गति से जा रही है, वह दिन दूर नहीं जब कोरोना से संक्रमित होने वाले नागरिकों की संख्‍या को …

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मध्य प्रदेश में ‘सरकारात्मक पत्रकारिता’ का कोरोना-कालीन मुजरा

कुछेक अपवाद को छोड़कर इन दिनों लगभग सभी अखबार कोरोना महामारी को लेकर सारी खबरें वैसी ही छाप रहे हैं जैसा सरकार चाहती है

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पत्रकारों की छंटनी और वेतन कटौती पर सुप्रीम कोर्ट में PIL मंजूर, केंद्र सहित INS-NBA को नोटिस

इस संयुक्त याचिका में कम से कम नौ मामलों का उदाहरण दिया गया है जिनमें वेतन कटौती, अनिश्चित काल तक कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजे जाने और नौकरी से निकाले जाने के मामले शामिल हैं।

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राग दरबारीः एक ‘टोमैटो इंटेलेक्चुअल’ पर बंदिश लगाने और टमाटर-मिर्च की दमड़ी वसूलने वाला मीडिया

हकीकत तो यह है कि रामचंद्र गुहा के इस लेख से ज्यादा गंभीर अल्पना किशोर का लेख है. फिर भी हिन्दुस्तान टाइम्स ने उस लेख को छापने से मना कर दिया.

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कोरोना के बहाने मीडिया में छंटनी और वेतन कटौती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल

नेशनल अलायंस आफ जर्नलिस्ट्स, दिल्ली यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स और बृहन्मुंबई यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स ने 16 अप्रैल को भारत की सर्वोच्च अदालत में नौकरियों की छंटनी और वेतन कटौती को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है।

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पत्रकारिता के दारा सिंहों! मदारी को खारिज कर दो, अब भी वक्त है!

दाराओं की फितरत है अपने आकाओं के लिए हत्याएं करना, बच्चों को जलाना, औरतों की हत्याओं का जश्न मनाना। मानवता का माखौल उड़ाना। “दारा” पूरे समाज को दारा बनाने के सपने देखता है लेकिन ये उसका दु:स्वप्न है। हम उन्हें विचारों से परास्त करेंगे।

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मीडिया में छंटनी, वेतन कटौती और तालाबंदी पर मुंबई प्रेस क्लब का बयान

क्लब के अनुसार कोरोना के सीज़न में पत्रकारों की वेतन कटौती, नौकरी से निकाला जाना और तालाबंदी कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है

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झूठ बोलने की व्‍यवस्‍थागत मजबूरी: पी. साइनाथ का दिल्ली में वक्तव्य

पी. साइनाथ ने यह व्‍याख्‍यान दिल्‍ली के कांस्टिट़यूशन क्‍लब में पिछले साल दिया था। उसके संपादित अंश प्रस्‍तुत हैं। A Structural Compulsion  To Lie जिस तरह किसी जंग को जनरलों के …

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