अमरकांत के कथा साहित्य में स्त्री की उपस्थिति

आज कथाकार अमरकांत की जयन्‍ती है। उनके लेखन का दायरा निम्नमध्यवर्ग और मध्यवर्ग की समस्याओं के आसपास केन्द्रित रहा है। इस समाज की आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति को अमरकांत ने व्यापक विस्तार के साथ चित्रित किया है।

Read More

भारत, पूंजीवाद, राष्ट्रवाद, साहित्य और राजनीति पर अरुंधति रॉय से सात सवाल

किसी नदी को आप विषमुक्‍त कैसे करते हैं? मेरे खयाल से, विष खुद-ब-खुद उसमें से निकल जाता है। बस, बहती हुई धारा अपने आप ऐसा कर देती है। हमें उस धारा का हिस्सा बने रहना होगा।

Read More

कथा कलकत्ता: एक बौद्धिक समाज के अवसान के सात दशक की आंखों देखी स्मृतियां

जिस कलकत्ते का मैंने जिक्र किया वह तो विलुप्त हो गया। अब तो बस दो-चार नामलेवा लेखक-कवि रह गए हैं जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। कविता के क्षेत्र में युवा पीढ़ी की संख्या इतनी है कि आप गिन नहीं सकते जबकि इनकी कविता में सबकुछ होता है पर कविता नहीं होती। कहानी लेखन का भी वही हाल है। संस्थाओं और मंचों पर कब्ज़ा ऐसे लोगों का है जो अपने प्रिय और प्रियाओं को मंच देते हैं। गंभीर लिखने वालों को दूर रखते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनको मंच दिया तो इनकी विद्वता की कलई न खुल जाए।

Read More

अनामिका-अकादमी, हंस-निशंक के रास्ते हिंदी साहित्य में हिंदू नाजीवाद का स्वीकरण

अगर मान लिया जाय कि अनामिका का पुरस्कार लेना उनका निजी मामला है तो भी यह सवाल तो बनता ही है कि असहिष्णुता के उत्तर-काल में साहित्य अकादमी पुरस्कारों की कोई नैतिक अपील बची भी है? अगर हां तो कोई बात नहीं. राम राज में सब माफ़ है. और अगर नहीं तो अनामिका के पुरस्कार को निजी ही रहने देना चाहिए. यह हिंदी भाषा और संस्कृति के लिए सार्वजनिक जश्न का मुद्दा कतई नहीं होना चाहिए.

Read More

सुलगती ईंटों का धुआँ: माता जुगरी देवी गाँव के लोग कथा सम्मान प्राप्त दलित चेतना की कहानी

कहानी की चयन समिति के सदस्य वरिष्ठ दलित-चिंतक प्रो. किशोरी लाल रैगर ने अपनी संस्तुति में लिखा है कि “सुलगती ईंटों का धुआँ” दलित चेतना की सशक्त कहानी है जिसमें कहानीकार ने जातिवाद व सामंती सोच के विरुद्ध मिन्ती जैसे जीवट पात्र की रचना की है।

Read More

पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान कवि-कथाकार और संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह को

इनका एक कविता संग्रह ‘अर्द्ध-विधवा’ 2014 में ‘गुलमोहर क़िताब’ प्रकाशन से प्रकाशित है। दूसरा कविता संग्रह प्रकाशनाधीन है और एक कहानी संग्रह भी तैयार है। इनकी रचनाएँ ‘पहल’, ‘जनसंदेश टाइम्स’, ‘वागर्थ’, ‘जनसत्ता’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘आजकल’, ‘समकालीन जनमत’, ‘पक्षधर’, ‘दलित अस्मिता’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।

Read More