सुलगती ईंटों का धुआँ: माता जुगरी देवी गाँव के लोग कथा सम्मान प्राप्त दलित चेतना की कहानी

कहानी की चयन समिति के सदस्य वरिष्ठ दलित-चिंतक प्रो. किशोरी लाल रैगर ने अपनी संस्तुति में लिखा है कि “सुलगती ईंटों का धुआँ” दलित चेतना की सशक्त कहानी है जिसमें कहानीकार ने जातिवाद व सामंती सोच के विरुद्ध मिन्ती जैसे जीवट पात्र की रचना की है।

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पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान कवि-कथाकार और संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह को

इनका एक कविता संग्रह ‘अर्द्ध-विधवा’ 2014 में ‘गुलमोहर क़िताब’ प्रकाशन से प्रकाशित है। दूसरा कविता संग्रह प्रकाशनाधीन है और एक कहानी संग्रह भी तैयार है। इनकी रचनाएँ ‘पहल’, ‘जनसंदेश टाइम्स’, ‘वागर्थ’, ‘जनसत्ता’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘आजकल’, ‘समकालीन जनमत’, ‘पक्षधर’, ‘दलित अस्मिता’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।

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