झूठ बोलने की व्‍यवस्‍थागत मजबूरी: पी. साइनाथ का दिल्ली में वक्तव्य

पी. साइनाथ ने यह व्‍याख्‍यान दिल्‍ली के कांस्टिट़यूशन क्‍लब में पिछले साल दिया था। उसके संपादित अंश प्रस्‍तुत हैं। A Structural Compulsion  To Lie जिस तरह किसी जंग को जनरलों के …

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त्रिलोचन, माओरी और भाषाधर्मी मित्रों के बारे में

‘भाषाई आत्मसम्मान और एक्टिविज्म’का सवाल जीतेंद्र रामप्रकाश अनुवाद: अभिषेक श्रीवास्तव ‘बोलना का कहिए रे भाई,बोलत बोलत तत्त नासाई’ (मैं वाणी के बारे में क्या कहूं भाई?वाणी की अधिकता से तो …

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त्रिलोचन, माओरी और भाषाधर्मी…

दरअसल, भाषा के प्रति किसी का रवैया जीवन के प्रति उसके रवैये को प्रतिबिंबित करता है। यह कुछ महत्वपूर्ण चीजों के प्रति उसके वास्तविक रवैये का विस्तार है- जैसे संबंध, …

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