एक उम्मीद जो तकलीफ़ जैसी थी: जनसत्ता का सती प्रसंग
जनसत्ता के 12 नवंबर 2012 अंक में छपे खाप का समर्थन करते शंकर शरण के लेख पर पिछले पोस्ट में हमने वरिष्ठ लेखक उदय प्रकाश की प्रतिक्रिया देखी जिसमें उन्होंने …
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जनसत्ता के 12 नवंबर 2012 अंक में छपे खाप का समर्थन करते शंकर शरण के लेख पर पिछले पोस्ट में हमने वरिष्ठ लेखक उदय प्रकाश की प्रतिक्रिया देखी जिसमें उन्होंने …
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पी. साइनाथ ने यह व्याख्यान दिल्ली के कांस्टिट़यूशन क्लब में पिछले साल दिया था। उसके संपादित अंश प्रस्तुत हैं। A Structural Compulsion To Lie जिस तरह किसी जंग को जनरलों के …
Read More‘भाषाई आत्मसम्मान और एक्टिविज्म’का सवाल जीतेंद्र रामप्रकाश अनुवाद: अभिषेक श्रीवास्तव ‘बोलना का कहिए रे भाई,बोलत बोलत तत्त नासाई’ (मैं वाणी के बारे में क्या कहूं भाई?वाणी की अधिकता से तो …
Read Moreदरअसल, भाषा के प्रति किसी का रवैया जीवन के प्रति उसके रवैये को प्रतिबिंबित करता है। यह कुछ महत्वपूर्ण चीजों के प्रति उसके वास्तविक रवैये का विस्तार है- जैसे संबंध, …
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