काशी की सियासी तारीख के अहम किरदार और कम्युनिस्टों के गुरु कामरेड विशु दा

बनारस ही नहीं बल्कि वामपंथी दुनिया में उन्हें वैचारिकी का स्रोत समझा जाता था। एस.ए. डांगे, मोहित सेन, भूपेश गुप्त, इन्द्रजीत गुप्त, बी.डी.जोशी आदि के साथ पार्टी को मजबूत करने तथा जनांदोलनों की दशा और दिशा तय करने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभायी। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन अधिकारी तो कामरेड विश्वेश्वर मुखर्जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।

Read More

विसर्ग के अनैतिक संसर्ग में फंसे बनारस के बहाने हिन्दी के कुछ सबक

किसी भी भाषा का मूल तो स्वर यानी ध्वनि ही है। हिंदी में यह अधिक है, तो यह उसकी शक्ति है, लेकिन इसे ही यह हटा रहे हैं। कई भाषाओं में कम ध्वनियां हैं तो उन्हें आयातित करना पड़ा है और यह बात अकादमिक स्तरों पर भी मानी गयी है। कामताप्रसाद गुरु ने भी अपनी किताब ‘हिंदी व्याकरण’ में इसी बात पर मुहर लगायी है कि हिंदी मूलत: ध्वनि का ही विज्ञान है।

Read More

बनारस: PM मोदी के गोदी गाँव में भुखमरी के कगार पर खड़े बुनकरों का भड़का आक्रोश

कांग्रेस महासचिव प्रियांका गांधी वाड्रा ने यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को बुनकरों की समस्याओं को लेकर पत्र लिखा है. पत्र में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना को पुनः बहाल करने की मांग को प्रमुखता के साथ उठाया है.

Read More

स्मृतिशेष: मुन्ना मारवाड़ी चले गए, काशी अब ‘बाकी’ नहीं है

यह विस्‍थापन सामान्‍य नहीं था। मुन्‍ना मारवाड़ी का पूरा अस्तित्‍व ही विस्‍थापित हो चुका था। मुन्‍नाजी को अब अदालत से भी कोई उम्‍मीद नहीं रह गयी थी। वे बस बोल रहे थे, बिना कुछ खास महसूस किए। मैं उनकी आंखों में देख रहा था, बिना कुछ खास सुने।

Read More

गाहे-बगाहे: हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह…

बनारस हमेशा से ऐसा ही था। दोहरे चरित्रों वाला और अनेक अंतर्विरोधों के साथ गुत्थम-गुत्था। केवल हम बाद में उसे जानने लगे। और लम्बे समय बाद इसलिए जानने की जरूरत पड़ी क्योंकि हम अपना बनारस लेकर किसी और शहर में चले गये थे और यहां का बनारस अपनी गति से चलता रहा। क्या हम अपडेट नहीं थे?

Read More

तबाही के मुहाने पर खड़े बुनकरों के लिए मुफ्ती-ए-बनारस ने लगायी अपने सांसद मोदी से गुहार

मुफ्ती-ए-बनारस ने अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बिजली दर की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग करते हुए एक अपील जारी की है।

Read More

गाहे-बगाहे: मशीनों के आगोश में बुनकरी है, तबाही के पहलू में कारीगरी है!

लॉकडाउन ने बुनकरों को भुखमरी और मौत के कगार पर ला खड़ा किया है. काम चलने का कोई आसार नहीं है. ऊपर से उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली का दाम बहुत ज्यादा बढा दिया है. पहले जहाँ हज़ार-डेढ़ हज़ार रुपये बिजली का बिल आता था वहीं अब मनमाने ढंग से कहीं तीस हज़ार तो कहीं चालीस हज़ार आ रहा है. कहीं कोई सुनवाई नहीं है.

Read More

छान घोंट के: लॉकडाउन से बदरंग हुए बनारस में जन पत्रकारिता का एक साहसी दस्तावेज़

लॉकडाउन के दौरान इसी जरूरत और ज़मीनी हकीकत को समझाने वाली वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की हाल ही में प्रकाशित किताब है “बनारस लॉकडाउन”, जो बताती है कि लॉकडाउन के 75 दिनों की जिंदगी क्या रही।

Read More

जब पीड़ित ने अपने पक्ष में खबर लिखने वाले पत्रकार पर ही करवा दी FIR! सुप्रिया शर्मा का केस

बनारस में भुखमरी के शिकार मुसहरों से जुड़े अंकरी काण्ड की धूल अभी बैठ ही रही थी कि एक और पत्रकार के ऊपर मुकदमा लाद दिया गया है. दिलचस्प है …

Read More

“काशी में शंकराचार्य परम्परा और सनातन धर्म को खण्डित करने का षड्यन्त्र”!

काशी के सरस्वती फाटक पर स्थित आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित देवी सरस्वती के मन्दिर को तोड़ने के खिलाफ़ जारी वक्तव्य

Read More