डिक्टा फिक्टा: मेलज़र की चेतावनी, भुतहा फिल्में और ‘सब याद रखा जाएगा’ की फंतासी

प्रोफ़ेसर मेलज़र ने स्पष्ट लिखा है कि इतने साल तक वे जूलियन असांज के विरुद्ध चल रहे दुष्प्रचार के प्रभाव में रहे और उन्हें भी लगता रहा था कि असांज पर लगाए जा रहे आरोप सही हैं, जबकि सच यह है कि यह सब उन अपराधों से ध्यान हटाने के लिए किया गया है जिन्हें असांज ने हमारे सामने उजागर किया है.

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भारत में हर रोज पुलिस अभिरक्षा में क्यों होती हैं मौतें?

पुलिस के चरित्र को बदलने के लिए समाज व राज का लोकतांत्रिक होना जरूरी है. यदि समाज चाहता है कि उसे मानवीय, संवेदनशील एवं कानून का सम्मान करने वाली पुलिस मिले तो पुलिस में मूलभूत सुधारों की जरूरत होगी, जिसे कोई भी सरकार या मौजूदा पूंजीवादी दल नहीं करना चाहते है. इसके लिए नई जन राजनीति को खड़ा करना होगा!

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तूतुकुडी काण्ड: NAPM ने बाप-बेटे की मौत की जांच CBI के बजाय SIT से करवाने की मांग उठायी

एन.ए.पी.एम तूतुकुडी पुलिस के हाथों जयराज व बेनिक्स की हिरासत में प्रताड़ना, यौन हिंसा और मौत की तीव्र निंदा करती है

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