लॉकडाउन के तले सरकार ने मजदूरों को उनकी औकात दिखाने का काम किया है

पूर्ण रोजगार की एक नीति के सभी विचारों को नीतिगत चर्चा से दूर रखा जाता है और बेरोजगारी एवं विनाश को बढ़ने दिया जाता है. यह कदम मजदूरी को लेकर मोलभाव करने की मजदूरों की शक्ति को कमजोर करने की नीयत से सिर्फ मजदूरों की एक आरक्षित सेना नहीं बनाये रख रहा है, बल्कि मज़दूरों की उनकी औकात भी दिखाता है.

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छान घोंट के: लॉकडाउन से बदरंग हुए बनारस में जन पत्रकारिता का एक साहसी दस्तावेज़

लॉकडाउन के दौरान इसी जरूरत और ज़मीनी हकीकत को समझाने वाली वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की हाल ही में प्रकाशित किताब है “बनारस लॉकडाउन”, जो बताती है कि लॉकडाउन के 75 दिनों की जिंदगी क्या रही।

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सोनभद्र: लॉकडाउन में पत्रकार की पुलिस द्वारा पिटाई पर NHRC सख्त, SP से मांगी छह हफ्ते में ATR

सोनभद्र के पिपरी थाना क्षेत्र में लॉकडाउन के दौरान मई के पहले सप्ताह में एक पत्रकार की पुलिस द्वारा की गयी बर्बर पिटाई पर राष्ट्रीय मानवाधिकार योग ने कड़ाई से संज्ञान लिया है. आयोग ने आगामी छः सप्ताह के भीतर सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

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जब पीड़ित ने अपने पक्ष में खबर लिखने वाले पत्रकार पर ही करवा दी FIR! सुप्रिया शर्मा का केस

बनारस में भुखमरी के शिकार मुसहरों से जुड़े अंकरी काण्ड की धूल अभी बैठ ही रही थी कि एक और पत्रकार के ऊपर मुकदमा लाद दिया गया है. दिलचस्प है …

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तन मन जन: लॉकडाउन-अनलॉक के चक्‍कर में ‘जात भी गयी और भात भी नहीं खाया’!

लॉकडाउन के कई चरण के बाद ‘‘अनलॉक’’ की रणनीति देश पर भारी पड़ रही है। अब भारत दुनिया के उन 15 देशों में प्रमुख है जहां पर सबसे ज्यादा कोरोना …

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लॉकडाउन की मार झेल रहे गरीब मजदूरों-छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल

भूख हड़ताल में कुल 90 साथियों ने भागीदारी की। इसमें 44 पछास के छात्र साथी, 20 इंकलाबी मजदूर केंद्र के साथी, 18 प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के साथी, 5 क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के साथी और 3 अन्य साथी शामिल हैं।

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लॉकडाउन एक ऐसा समाधान है जो अपने लिए एक समस्या की तलाश कर रहा है: बजाज

लॉकडाउन से परेशान उद्योगपतियों में बजाज एक बार फिर मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पहले बड़े उद्योगपति बन गये हैं।

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किसानों, मजदूरों और छोटे उद्योगों के हालात पर प्रियंका गांधी का UP के मुख्यमंत्री को पत्र

उन्होंने किसानों की समस्याओं पर पत्र में लिखा है कि किसानों की गेहूं की फसल की कटाई का समय चल रहा है। किसान बुरी तरह से परेशान हैं कि कटाई कैसे होगी। प्रदेश में कम्बाइन मशीनों से कटाई की इजाजत भी दे दी है परंतु अभी तक कम्बाइन मशीनों के मालिक प्रशासन से भयभीत हैं। ज्यादातर इन मशीनों के चालक दूसरे प्रदेशों से आते हैं। उनके आने की व्यवस्था की जाए। सही सूचना के अभाव में और जुर्माने के डर से किसान रात-बिरात गेहूं काट रहे हैं।

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लॉकडाउन के दौरान देश भर में गरीबों-वंचितों की मदद कर रहे लोगों और संगठनों की सूची

आजीविका ब्यूरो इसी तरह के सभी संगठनों और व्यक्तियों की अद्यतन सूची जारी कर रहा है। रोज़ाना इस तरह के संगठनों और लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। उसी हिसाब से सूची में भी रोज़ परिवर्तन किए जा रहे हैं।

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सब कुछ ठप पड़ा है, फिर विश्व बैंक को ग्रोथ कहां दिख रही है?

इस बार सारा मामला मनोवैज्ञानिक है। कुछ तो जेनुइन भी है। हर आदमी को डर लग गया है कि कहीं मेरी ही मौत न हो जाए। इसके चलते एक दिमागी लॉकडाउन रहेगा लंबे समय तक। खेल, मनोरंजन, पार्टियां, सिनेमाहॉल, यात्रा, पर्यटन, सब कुछ पोस्टपोन हो जाएगा। लॉकडाउन उठ भी गया तो लोग खुद ही इस पर लगाम लगाएंगे। सबसे बड़ा सवाल शिक्षा का है कि स्कूल कॉलेज कब खुलेंगे।

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