प्रदूषक कम्पनियों के खिलाफ जलवायु मुकदमे करना हुआ आसान, गुणारोपण विज्ञान पर नया शोध

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से कानूनी कार्रवाई का विषय बन रहा है। अब तक दुनिया भर में जलवायु संबंधी 1500 मुक़दमे दायर हुए हैं, जिसमें पिछले महीने का एक मामला भी शामिल है जहां एक डच अदालत ने शेल कंपनी को अपने उत्सर्जन में कटौती करने का आदेश दिया था।

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2020 से भी गरम होंगे आने वाले साल, ‘रेस टु ज़ीरो’ में शामिल हुए दुनिया भर के स्वास्थ्य संस्थान

इस बात का पता चला है वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्लूएमओ) और UKMET यूके (यूनाइटेड किंगडम) मेट (मौसम) कार्यालय की सालाना जारी होने वाली ताज़ा ग्लोबल क्लाइमेट अपडेट नाम की रिपोर्ट में, जो अगले पांच वर्षों के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों की भविष्यवाणी करती है।

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जलवायु परिवर्तन: रॉयल डच शेल के खिलाफ हेग की अदालत का ऐतिहासिक फैसला

यह अपनी तरह का पहला कानूनी निर्णय है जो वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप एक प्रदूषणकारी अंतरराष्ट्रीय कम्पनी को अपने उत्सर्जन को कम करने के लिए आदेश देता है।

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जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में स्वैच्छिक कार्बन बाज़ारों का विस्तार ज़रूरी

कार्बन क्रेडिट अंतर्राष्ट्रीय उद्योग में उत्सर्जन नियंत्रण की योजना है । कार्बन क्रेडिट सही मायने में आपके द्वारा किये गये कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने का प्रयास है जिसे प्रोत्साहित करने के लिए धन से जोड़ दिया गया है।

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पूरी दुनिया को लॉकडाउन करने के बावजूद रिकॉर्ड स्तर पर कायम है ग्रीनहाउस उत्सर्जन: WMO

लॉकडाउन ने कार्बन डाइऑक्साइड जैसे कई प्रदूषकों के उत्सर्जन में तो कटौती की, लेकिन CO2 सांद्रता पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। डब्लूएमओ ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के अनुसार, कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में 2019 में तो वृद्धि बनी ही रही, वो वृद्धि 2020 में भी जारी है।

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पंचतत्व: ऑस्ट्रेलिया में ऊंटों का कत्ले आम और कुदरती न्याय का सबक

ऑस्ट्रेलिया ने ऊंटों के सामूहिक क़त्ल के पीछे अपना कार्बन फुटप्रिंट कम करने को भी वजह बताया था. पर क्या यह वाक़ई तार्किक है या बहाना है? यह धरती महज इंसानों की है? या दूसरे जीवों का भी इस पर हक़ है?

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