तन मन जन: कोरोना ने प्राइवेट बनाम सरकारी व्यवस्था का अंतर तो समझा दिया है, पर आगे?

स्वास्थ्य और उपचार का सवाल जीवन से जुड़ा है और यह हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। स्वास्थ्य सेवाओं को निजीकरण के जाल से बाहर निकाले बगैर आप स्वस्थ मानवीय जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। अभी भी वक्त है। जागिए और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गारन्टी के लिए आवाज बुलंद कीजिए।

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समानता के विचार से इतना परहेज़ क्यों है सरकार, कि सुझाव देने वाले IRS अफ़सरों को ही मुजरिम बना दिया?

इस रिपोर्ट के आते ही वित्त मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ (CBDT) सकते में आ गये और आनन–फानन में इस रिपोर्ट से पल्ला झाड़ने लगे। मात्र चौबीस घंटे के अंदर रिपोर्ट जारी करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की दिशा में ठोस कदम उठा लिए गये।

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