पंचतत्व: वनों का प्रबंधन स्थानीय समुदायों के हाथ में देने से कौन रोक रहा है?

उत्तराखंड की खासियत है कि हर वन पंचायत स्थानीय जंगल के उपयोग, प्रबंधन और सुरक्षा के लिए अपने नियम खुद बनाती है. ये नियम वनरक्षकों के चयन से लेकर बकाएदारों को दंडित करने तक हैं. सरमोली के विर्दी गांव में, जंगल की सुरक्षा के पंचायती कानून के तहत जुर्माना 50 रुपये से 1,000 रुपये तक है.

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पंचतत्व: सतभाया का शेष

कानपुरू में 303 घर बचे हैं और उनमें अफरातफरी का, बेचैनी का आलम बना रहता है. पड़ोस के सतभाया गांव में भी परिस्थिति कमोबेश ऐसी ही है. हर साल समुद्र करीब 80 मीटर आगे बढ़ जाता है.

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पंचतत्व: देवास ने मिट्टी से जल संकट का समाधान निकाल कर कैसे बुझायी अपनी प्यास

देवास की मिट्टी काली कपासी मिट्टी है जिसमें कण बेहद बारीक होते हैं. इससे सतह पर बहने वाला जल रिसकर भूजल को रिचार्ज नहीं कर पाता. बहरहाल, मिट्टी की समस्या का समाधान भी मिट्टी ने ही निकाला.

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पंचतत्व: अकाल और सूखे की वजह है जल संरक्षण की सूखती परंपराएं

भारत के हालिया जलवायु परिवर्तन मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के औसत तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस का परिवर्तन देखा गया है. स्थानीय और वैश्विक तापमान में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर हमें विभिन्न मौसमी घटनाओं में आए तेज बदलाव के रूप में देखने को मिल रहा है.

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पंचतत्व: जलवायु में बदलाव का सबसे बुरा असर हाशिये के तबकों पर हो रहा है

मैदानी इलाकों में भी जहां खेती का नियंत्रण भले ही मर्दों के हाथ में हो लेकिन खेती के अधिकतर काम, बुआई, कटाई और दोनाई में महिलाओं की हिस्सेदारी अधिक होती है, जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिख रहा है.

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पंचतत्व: UP और बिहार की हवा में जरूरत से ज्यादा घुल गया है ज़हर, अपने बच्चों को बचाइए!

वायु प्रदूषण का सबसे बुरा असर उत्तर प्रदेश और बिहार पर दिखा है। उत्तर प्रदेश को राज्य के जीडीपी का 2.2 फीसद और बिहार को अपने जीडीपी का 2 फीसद हिस्सा वायु प्रदूषण के कारण गंवाना पड़ा है, लेकिन यह हैरत की बात है क्योंकि दोनों की राज्यों में उद्योगों की स्थिति के लिहाज से प्रदूषण का स्तर इतना ऊंचा हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल ही है।

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पंचतत्व: अब भी दस साल का वक्त है, संभल जाइए वरना जीते जी प्यासा मरना पड़ सकता है!

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन, ये चार देश मिलकर दुनिया के सालाना भूमिगत जल का आधे से अधिक हिस्सा हड़प लेते हैं. इसलिए इन देशों में नदी बेसिनों में जलभंडार का रिचार्ज होना बेहद अहम है क्योंकि खेती, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और विकास की तकरीबन सारी गतिविधियों के लिए पानी अपरिहार्य है.

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पंचतत्व: विकास को संतुलन चाहिए और चैनलों को विज्ञान रिपोर्टर वरना ग्लेशियर ‘टूटते’ रहेंगे!

ग्लेशियर, मोरेन और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के बीच के अंतर को बताते हुए अगर रिपोर्टिंग होती तो लगता कि पर्यावरण को लेकर हमारा मीडिया साक्षर है. ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे टीवी चैनलों को विज्ञान रिपोर्टरों की सख्त जरूरत है.

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पंचतत्व: मिथिला में अब कहां मीन और कहां मखान!

असल में पिछले डेढ़ दशक से मिथिला के शहरी इलाकों में जल संकट गहराने लगा है. उसके पहले ऐसा होना अभूतपूर्व ही थी. मिथिला के पोखरे भूमिगत जल स्तर को रिचार्ज करते रहते थे और सदियों से यह कुदरती तौर पर वॉटर हार्वेस्टिंग का तरीका था.

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पंचतत्व: पुणे की मुथा नदी को जिंदगी देने की कोशिश

पुणे शहर के पास कई हिस्सों में मुथा नदी की धारा थम गई है और उसमें जलीय जीवन लगभग खत्म ही है. इस नदी में केमिकल ऑक्सीजन डिमांड, बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (डीओ) के स्तर में लगातार कमी आती गई है.

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