आर्टिकल 19: आजतक नहीं, रिपब्लिक! जब खालिस दुर्गंध यहां मिले तो कोई वो क्‍यूं ले, ये न ले…

आजतक की ये दुर्गति इसलिए हुई है कि अरुण पुरी ने अर्णब गोस्वामी बनने में पूरी ताकत झोंक दी। उसके पास न अपनी रिपोर्टें थीं, न अपना कोई पत्रकारीय विमर्श और न ही कोई स्वतंत्र सोच। आजतक बस ईवेंट जर्नलिज्म कर सकता था।

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अरुण पुरी, रोहित सरदाना व संबित पात्रा पर क्यों न चले राजीव त्यागी की हत्या का मुकदमा?

जब बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा राजीव त्यागी को जयचंद जयचंद कहकर अपमानित कर रहे थे तो एक बार भी सरदाना ने पात्रा को नहीं रोका.

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कोरोना से जुड़ी भ्रामक सूचना फैलाने के लिए स्वामी रामदेव और आजतक पर FIR की अर्ज़ी

शिकायत में कहा गया है कि योग गुरु ने 25 अप्रैल को दिन में 12 बजे आजतक चैनल पर कोरोना से बचाव के झूठे नुस्खे प्रचारित किये और लोगों को दिग्भ्रमित किया।

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