कोरोना की तबाही से जागा बनारस, स्वास्थ्य-शिक्षा और आजीविका के मुद्दे पर जन अधिकार यात्रा

इस यात्रा से पहले बनारस से पहली बार स्‍वास्‍थ्‍य का अधिकार बनाए जाने की मांग उठी थी और उसके समर्थन में एक हस्‍ताक्षर अभियान चलाया गया था।

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बनारस: जान जोखिम में डाल के लोगों को बचाने वाले ग्रामीण चिकित्सकों और पत्रकारों का सम्मान

जब सरकारी अस्पतालों और बड़े अस्पतालों में बेड और आक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ था उस समय दूरदराज के गाँवों में चिकित्सकजन ने बड़े ही जिम्मेदारी से पीड़ित और संक्रमित लोगों को चिकित्सा सुलभ करायी। इन चिकित्सकों के पास प्रायः बड़ी डिग्री नहीं होती लेकिन इनका विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज करने का अनुभव कहीं बहुत ज्यादा है और यही कारण था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इन चिकित्सकों ने ग्रामीण क्षेत्र में हजारों लोगों की जान बचायी।

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बनारस: गांव-गांव बिना संसाधन जान बचाने वाले 250 असली ‘कोरोना योद्धाओं’ को अनूठा सम्मान

वरिष्ठ समाजवादी चिंतक डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सेवा कर रहे निजी चिकित्सकों ने महामारी के दौर में मानवता की सेवा की मिसाल कायम की है, उन्हें प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है।

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भारत आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द की गौरवशाली परम्परा का देश है: डॉ. आरिफ

असंगठित खेत्र अथवा भवन निर्माण में लगे मजदूरो, खेती किसानी के कार्य में लगे भूमिहीन किसान व खेतिहर मजदूरों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली अति आवश्यक है वर्तमान दौर में कार्पोरेट घरानों के दबाव में इस व्यवस्था पर अस्तित्व का संकट आसन्न है,

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