किसान संसद शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी: SKM

आज की कार्यवाही में एपी फार्मर्स एसोसिएशन कोआर्डिनेशन कमिटी के बैनर तले किसान संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। एमएसपी पर बहस खत्म होने के बाद शुक्रवार को किसान संसद किसान विरोधी नीतियों को लेकर मौजूदा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। भारत छोड़ो दिवस के अवसर पर सोमवार को अखिल महिला संसद में प्रस्ताव पर मतदान होगा।

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किसान-मजदूर एकता से ही रुकेगी कॉर्पोरेट की मनमानी: श्रमिक संसद में मेधा पाटकर

सेंचुरी आंदोलन ने 1208 दिनों के सत्याग्रह से इतिहास रचा है और यूनियंस का तथा समाज का भी प्रबोधन किया है। पिछले 3 साल से ज्यादा समय से चल रहा यह आंदोलन देश के श्रमिक आंदोलन को निश्चित ही एक दिशा देगा। यहां से उठी आवाज किसानों मजदूरों की लड़ाई को मंजिल तक पहुंचाएगा। देश और प्रदेश की सरकार भले ही पूंजीपति की चाकरी में जुटी रहे लेकिन अंततः जीत मजदूरों की ही होगी।

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23-24 जनवरी को ‘किसान संसद’, चर्चा के लिए आमंत्रित होंगे सभी दलों के MP, कृषि विशेषज्ञ और किसान नेता

प्रशांत भूषण के नेतृत्व में गठित दर्जन भर चर्चित लोगों की एक कमिटी ने आगामी 23-24 जनवरी को दो दिवसीय ‘किसान जन संसद’ बुलाया है. इस किसान संसद में तीनों कृषि कानून, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP),किसानों पर सत्ता का दमन के साथ किसानों की अन्य समस्याओं पर चर्चा की जाएगी. इस किसान संसद में सभी दलों के सीटिंग व पूर्व सांसदों को शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा जाएगा. नेशन फॉर फार्मर्स, पीपल फर्स्ट और जनसरोकार जैसे संगठनों ने इस इस ‘किसान संसद’ का समर्थन किया है.

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किसान आंदोलन के समर्थन में UP, MP और महाराष्ट्र से लोग पहुंचे दिल्ली

दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की नेता मेधा पाटकर और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोशलिस्ट पार्टी  के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. संदीप …

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बड़वानी से ट्रैक्टर रैली लेकर मेधा पाटकर ने की तीन जिलों की परिक्रमा, दो दर्जन सभाएं

इस रैली में नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े किसान, मछुआरे, कुम्हार, केवट, पशुपालक तो शामिल थे ही, साथ ही सेंचुरी के 3 साल से आंदोलन चला रहे मजदूर भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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महात्मा गाँधी को प्रतीकात्मक ही नहीं बल्कि धरातल पर उतारना है ज़रूरी: मेधा पाटकर

मेधा का मानना है कि सबका-साथ-सबका-विकास का सपना साकार करने के लिए, सबके सतत विकास के लिए एवं न्यायपूर्ण मानवीय व्यवस्था के लिए, महात्मा गाँधी का सुझाया हुआ सहकारिता (cooperative) का रास्ता ही आज के परिप्रेक्ष्य में सही रास्ता है.

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“एक बेहतर दुनिया की ओर”: मेधा पाटकर ने शुरू किया ग्रेटा थुनबर्ग से प्रेरित युवाओं का नया अभियान

प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने इस अभियान को जारी करते हुए देश-विदेश के युवाओं को याद दिलाया कि महात्मा गाँधी ने कहा था कि प्रकृति में इतने संसाधन तो हैं कि हर एक की ज़रूरतें पूरी हो सकें परन्तु इतने नहीं कि एक का भी लालच पूरा हो सके.

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