पंचतत्वः तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं!

वास्को डि गामा के हिंदुस्तान की धरती पर पैर रखने के महज 30 साल के भीतर पश्चिमी तट मिर्ची उगाया जाने लगा था और बाद में इस मिर्च को गोवाई मिर्ची कहा गया।
गोवा से वह दक्षिण भारत में फैल गया।

Read More

बात बोलेगी: फिर आया लोकतंत्र के कर्मकांड का मौसम…

पहले जब राज्यों में चुनाव हुआ करते थे तो राज्य सरकारों की ही शक्तियां चुनाव आयोग को हस्तांतरित हुआ करती थीं। इधर कुछ वर्षों में, विशेष रूप से जब से भारतीय जनता पार्टी मौज में आयी है, तब से चुनाव भले ही घाना या नाइजर या टोगो में हों लेकिन सबसे पहले स्थगित होती है केंद्र की सरकार।

Read More

पंचतत्व: ज्यों ‘ताड़’ माहिं ‘तेल’ है!

असली चिंता यह नहीं है कि इस कृषि वानिकी की लागत क्या होगी। असली चिंता वह लागत है जो पारिस्थितिकी के नुकसान से पैदा होगी। सुमात्रा, बोर्नियो और मलय प्रायद्वीप मिसालें हैं जहां वैश्विक पाम ऑयल का 90 फीसद उत्पादित किया जाता है। इन जगहों पर इसकी व्यावसायिक खेती के लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटे गए और स्थानीय जल संसाधनों पर इसका भारी बोझ पड़ा क्योंकि ताड़ तेल की खेती के लिए पानी की काफी जरूरत होती है।

Read More

बात बोलेगी: फिर इस मज़ाक को जम्हूरियत का नाम दिया…

जनता अब जम्हूरियत की चाभी नहीं, उसकी चेरी है। और हम जनता की तरफ से जनता के लिए जनता द्वारा चुनी गयी इस भूमिका को जम्हूरियत बतलाते हुए इसे इसके पुराने वैभव में लौटाने के लिए इसे बचाने पर आमादा हैं।

Read More

तन मन जन: अपने अन्दर के इन्सान को जगाइए, आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत हो जाएगी!

। ध्यान रहे, महामारी भी कमजोर इम्यूनिटी वाले को ही निशाना बनाती है और कट्टरता तथा जाहिलपना भी बुद्धि-विवेक हीन व्यक्तियों को ही प्रभावित करती है। अपने अन्दर के इन्सान को जगाइए, आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत हो जाएगी। महामारी और जाहि‍लपने दोनों से मुक्ति चाहिए। इसी उम्मीद और उत्साह के साथ आप सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं।

Read More

बात बोलेगी: क्योंकि आवाज़ भी एक जगह है…

बीता साल कुछ ऐसा बीता जिसके बारे में सब कहते हुए पाये जाते हैं कि इसे बीत ही जाना चाहिए। लोगों को 2021 का कैलेंडर बेरहमी से फेंकते हुए देखा है क्योंकि इस गुजरे हुए साल ने कुछ भी ऐसा नहीं दिया जिसे सँजो कर रखा जाय।

Read More

बात बोलेगी: ‘प्रथम दृष्ट्या’ की कानूनी पुष्टि के इंतज़ार में…

एसआइटी (विशेष जांच दल) ने अब जाकर बताया है कि यह सब पूर्वनियोजित था- ठंडे दिमाग से रची गयी एक साजिश का अंजाम था। इस दल ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कथित लिंचिंग पर कुछ नहीं कहा क्योंकि जो कुठ भी हुआ वो इस घटना के बाद हुआ जो कि पूर्वनियोजित नहीं था।

Read More

बात बोलेगी: विस्मृतियों के कृतघ्न कारागार में एक अंतराल के बाद

सूचनाओं ने हमारे दिल-दिमाग को इस कदर भर दिया है कि उसमें सब कुछ केवल समाया जा रहा है। किसी सूचना का कोई विशिष्ट महत्व नहीं बच रहा है। मौजूदा हिंदुस्तान एक घटना प्रधान हिंदुस्तान बन गया है। इसमें घटनाएं हैं और केवल घटनाएं हैं। जब घटनाएं हैं तो उनकी सूचनाएं हैं। सूचनाएं हैं तो उनकी मनमाफिक व्याख्याएं भी हैं। व्याख्याएं हैं तो उसमें मत-विमत हैं। मत-विमत हैं तो वाद-विवाद हैं और वाद-विवाद हैं तो जीतने-हारने की कोशिशें भी हैं। पक्ष-विपक्ष अब केवल सत्ता के प्रांगण की शब्दावली नहीं रही बल्कि अब वह कटुता का एक नया रूप लेकर उसी खम के साथ एकल परिवारों से लेकर संयुक्त परिवारों, पड़ोस से लेकर मोहल्ले और मोहल्ले से लेकर गाँव तक बसेरा करती जा रही है।

Read More

हर्फ़-ओ-हिकायत: 2014 में स्वतंत्र हुए लोगों का ऐतिहासिक संकट

दरअसल, 1757 के प्लासी के युद्ध और 1764 में बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी ने भारत की सीमा में स्थित तमाम देशों को सहायक सेना संधि से डील कर लिया था। इस भारी मूर्खता को 1857 की आजादी की पहली जंग कहना अदभुत इतिहासबोध है। जिन्हें ये नहीं पता है कि 1858 में ब्रिटिश सरकार ने भारत का शासन अपने हाथ में लिया था वे अब बता रहे हैं कि 1947 में भारत को आजादी ‘भीख’ में मिली है।

Read More

तन मन जन: बदलते भू-उपयोग और जीवों से हमारे रिश्ते में छुपा है महामारियों का भविष्य

नये अध्ययन में पश्चिमी यूरोप से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक के देशों को शामिल किया गया। अध्ययन बताता है कि जहां-जहां जमीन के उपयोग का तरीका बदल रहा है और हॉर्स शू चमगादड़ों की प्रजातियां मौजूद हैं वहां से और भी खतरनाक प्रकार के कोरोना वायरस के उत्पन्न होने की पूरी आशंका है।

Read More