महिला उत्पीड़न: इतिहास, वर्ग और उत्पादन संबंधों की रोशनी में

बिहार में एक लड़की और उसके पुरुष मित्र के साथ हुई यौनिक हिंसा तथा दिल्ली के आस्‍था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना, दोनों मामले उस सामाजिक वास्तविकता की ओर संकेत करते हैं जिसमें लड़कियों की आवाजाही, दोस्ती और यौनिकता पर निगरानी को सामान्य बनाया जाता है।

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अस्पतालों में महिलाओं का यौन उत्पीड़न और समाज की भूमिका: संदर्भ भागलपुर

अस्पतालों और मेडिकल क्लीनिकों में यौन उत्पीड़न की और भी अनगिनत मौखिक कहानियां हैं जिन्‍हें सार्वजनिक करने की अनुमति न तो पीड़िता देती है और न ही उसका समाज. इसलिए बिहार की उस महिला के साहस को सलाम करना होगा कि उन्होंने अपनी व्यथा के माध्यम से पूरे भारत में व्याप्त अस्पतालों में इस तरह की मानसिकता का परदाफाश किया.

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वर्क फ्रॉम होम के दौर में लैंगिक उत्पीड़न का बदलता स्वरूप

हमें अपने परिवार, समाज के भेदभावपूर्ण ढाँचे को भी बदलना होगा, जहां लड़कों की हर बात को सही और लड़कियों के हर कदम को शंका की नज़र से देखा जाता है

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